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अधस्तनयुग्मानां समीचीनां तालिकां चिनुत-List-I List-IIa. सांख्यदर्शनम् i. अष्टाङ्गयोगःb. योगदर्शनम् ii. सत्कार्यवादःc. न्यायदर्शनम iii. प्रमाणमीमांसाd.
Question

अधस्तनयुग्मानां समीचीनां तालिकां चिनुत-

List-I

List-II

a. सांख्यदर्शनम्

i. अष्टाङ्गयोगः

b. योगदर्शनम्

ii. सत्कार्यवादः

c. न्यायदर्शनम

iii. प्रमाणमीमांसा

d. वेदान्तदर्शनम्

iv. अद्वैतवादः

समुचितं विकल्पं चिनुत -

A.

a-i, b-ii, c-iii, d-iv

B.

a-ii, b-i, c-iii, d-iv

C.

a-iv, b-ii, c-i, d-iii

D.

a-iii, b-iv, c-ii, d-i

Correct option is B

परिचय

यह तालिका हिंदू दर्शन के छह आस्तिक संप्रदायों (सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त) में से चार प्रमुख संप्रदायों को उनके विशिष्ट और मौलिक सिद्धांतों के साथ सुमेलित करती है।

व्याख्या

a. सांख्यदर्शनम् →  (ii) सत्कार्यवादः

  • सत्कार्यवाद: यह सांख्य दर्शन का मूलभूत सिद्धांत है।

  • सिद्धांत: इसके अनुसार, कार्य (उत्पन्न होने वाली वस्तु) उत्पत्ति से पूर्व भी कारण में सत् (विद्यमान) रहता है। अर्थात्, असत् (जो विद्यमान नहीं है) से सत् की उत्पत्ति नहीं हो सकती।

    • उदाहरण: तेल तिल में पहले से विद्यमान होता है।

  • अन्य मुख्य सिद्धांत: द्वैतवाद (प्रकृति और पुरुष का भेद), परिणामवाद।

b. योगदर्शनम् →  (i) अष्टाङ्गयोगः

  • अष्टाङ्गयोग: यह पतञ्जलि कृत योग दर्शन का केंद्रीय विषय है।

  • सिद्धांत: यह आठ अंगों (यम्, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) के माध्यम से चित्तवृत्ति निरोध (योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः) और कैवल्य (मुक्ति) की प्राप्ति का मार्ग बताता है।

  • अन्य मुख्य सिद्धांत: ईश्वर की सत्ता (ईश्वरप्रणिधान), अभ्यास और वैराग्य।

c. न्यायदर्शनम् →  (iii) प्रमाणमीमांसा

  • प्रमाणमीमांसा: यह न्याय दर्शन (गौतम ऋषि) का सबसे प्रमुख और मौलिक विषय है।

  • सिद्धांत: न्याय दर्शन का मूल कार्य प्रमाणों (ज्ञान के साधन—प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) का विस्तृत विश्लेषण करना है। न्याय दर्शन मानता है कि सोलह पदार्थों का ज्ञान केवल प्रमाणों के माध्यम से ही संभव है।

  • अन्य मुख्य सिद्धांत: अनेक प्रकार के हेत्वाभासों का वर्णन।

d. वेदान्तदर्शनम् → (iv) अद्वैतवादः

  • अद्वैतवाद: यह शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित वेदान्त दर्शन की प्रमुख शाखा का सिद्धांत है।

  • सिद्धांत: इसके अनुसार, अंतिम सत्य केवल एक है—ब्रह्म। जगत् (संसार) मिथ्या है, और जीव (आत्मा) तथा ब्रह्म में कोई भेद नहीं है (ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः)।

  • अन्य मुख्य सिद्धांत: मायावाद।

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