Correct option is C
परिचय: यह प्रश्न कौटिल्य द्वारा प्रतिपादित राज्य के स्वरूप (सप्तांग सिद्धांत) और उनके ग्रंथ की विषयवस्तु (दण्डनीति या केवल अर्थशास्त्र) से संबंधित है।
व्याख्या:
सही विकल्प (c) I सत्यम् परन्तु II असत्यम् है। अर्थात्, कथन I सत्य है और कथन II असत्य है।
कथन I : कौटिलीये अर्थशास्त्रे सप्ताङ्ग सिद्धान्तः प्रतिपादितः अस्ति। (सत्य) · यथार्थता: कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में राज्य के सप्ताङ्ग सिद्धांत का स्पष्ट प्रतिपादन किया है।
· सप्तांग: ये सात अंग हैं: स्वामी (राजा), अमात्य (मंत्री), जनपद (क्षेत्र और प्रजा), दुर्ग (किला), कोश (खजाना), दण्ड (सेना), और मित्र (सहयोगी)।
· निष्कर्ष: यह कथन सत्य है।
कथन II : कौटिल्यः केवलम् अर्थशास्त्रस्य सिद्धान्तं प्रतिपादयति, न तु दण्डनीतेः। (असत्य) · यथार्थता: यह कथन असत्य है।
· सही विवरण: कौटिल्य के अनुसार, अर्थशास्त्र एक व्यापक विषय है जिसमें न केवल संपत्ति और अर्थव्यवस्था, बल्कि दण्डनीति (शासन कला, न्यायशास्त्र और कानून) का भी गहन विवेचन शामिल है।
· दण्डनीति का महत्त्व: कौटिल्य दण्डनीति को सभी विद्याओं का आधार और राज्य के सफल संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक मानते हैं। उनका ग्रंथ दण्डनीति के सिद्धांतों से भरा हुआ है, जिसमें कानून (धर्मस्थीय), अपराध (कण्टकशोधन) और गुप्तचर व्यवस्था का विस्तृत वर्णन है।
· निष्कर्ष: कौटिल्य ने दण्डनीति का प्रतिपादन किया है, इसलिए यह कथन कि वह 'न तु दण्डनीतेः' (दण्डनीति का नहीं) प्रतिपादन करते हैं, असत्य है।