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    एतेषु कथनेषु विचार्यताम् 1. मनुस्मृतौ चातुर्वर्ण्यव्यवस्था प्रतिपादिता अस्ति। 2. धर्मशास्त्रे गृहस्थाश्रमस्य प्राधान्यं निर्दिष्टम्। 3. मनुस्
    Question

    एतेषु कथनेषु विचार्यताम्
    1. मनुस्मृतौ चातुर्वर्ण्यव्यवस्था प्रतिपादिता अस्ति।
    2. धर्मशास्त्रे गृहस्थाश्रमस्य प्राधान्यं निर्दिष्टम्।
    3. मनुस्मृतिः केवलं मोक्षशास्त्रम् नास्ति ।
    एतेषु कति कथनानि सम्यक् ?

    A.

    केवलम् एकम्

    B.

    केवलं द्वे

    C.

    सर्वे त्रयः

    D.

    न कश्चित्

    Correct option is C


    परिचय मनुस्मृति (या मानव धर्मशास्त्र) सबसे प्राचीन और प्रामाणिक धर्मशास्त्र ग्रंथ है, जिसमें धर्म, आचार, व्यवहार, वर्णधर्म और राजधर्म आदि का विस्तृत विवेचन किया गया है।
    व्याख्या
    दिए गए तीनों कथन सही हैं।
    · (c) सर्वे त्रयः सम्यक् (तीनों कथन सही हैं)।
    सही कथनों का विवरण:
    1. मनुस्मृतौ चातुर्वर्ण्यव्यवस्था प्रतिपादिता अस्ति।
    · यह कथन सही है।
    · मनुस्मृति में चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) के उत्पत्ति, लक्षण, धर्म (कर्तव्य) और व्यवहार का विस्तृत प्रतिपादन किया गया है।
    · जैसे- मनुस्मृति के प्रथम अध्याय में मनु ने सृष्टि की उत्पत्ति के बाद चारों वर्णों के कर्मों का विधान किया है: "अध्यापनमध्ययनं यजनं याजनं तथा। दानं प्रतिग्रहश्चैव षट्कर्माणि द्विजन्मनाम्।।" (ब्राह्मण के लिए छह कर्म)।
    2. धर्मशास्त्रे गृहस्थाश्रमस्य प्राधान्यं निर्दिष्टम्।
    · यह कथन सही है।
    · धर्मशास्त्र (मनुस्मृति आदि) में गृहस्थाश्रम को सभी आश्रमों में श्रेष्ठ और आधारभूत माना गया है।
    · इसका कारण यह है कि अन्य तीनों आश्रम (ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ और संन्यास) गृहस्थों द्वारा प्रदत्त भिक्षा, सहयोग और संतानों पर आश्रित होते हैं।
    · मनुस्मृति में कहा गया है: "यथा नदीनदाः सर्वे सागरे यान्ति संस्थितिम्। तथैवाश्रमिणः सर्वे गृहस्थे यान्ति संस्थितिम्।।" (जैसे सभी नदियाँ सागर में स्थित होती हैं, वैसे ही सभी आश्रमी गृहस्थ में स्थित होते हैं)।
    3. मनुस्मृतिः केवलं मोक्षशास्त्रम् नास्ति।
    · यह कथन सही है।
    · मनुस्मृति को मोक्षशास्त्र कहना अपर्याप्त है, क्योंकि यह मुख्य रूप से धर्मशास्त्र है।
    · यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पुरुषार्थों में से धर्म और अर्थ के व्यवहारिक पक्ष (जैसे राजधर्म, व्यवहार नियम, प्रायश्चित्त आदि) पर अधिक बल देती है।
    · मोक्ष इसका अन्तिम लक्ष्य है, किन्तु यह आचार, व्यवहार, प्रायश्चित्त आदि त्रिवर्ग के साधनों का समग्र विवेचन करती है, अतः यह केवल मोक्षशास्त्र नहीं है, बल्कि एक समग्र जीवन पद्धति का शास्त्र है।
    रोचक तथ्य
    · (a), (b), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
    · मनुस्मृति में 12 अध्याय और लगभग 2684 श्लोक हैं। इसका उपदेश मनु ने भृगु आदि ऋषियों को दिया था।

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