Correct option is C
'कीर्तिलता' के रचनाकार विद्यापति हैं, जो 14वीं शताब्दी के प्रसिद्ध मैथिली कवि थे। यह रचना अवहट्ट भाषा में लिखी गई है, जिसमें विद्यापति ने अपने आश्रयदाता कीर्तिसिंह की वीरता व उदारता का वर्णन किया है। 'कीर्तिलता' को ऐतिहासिक महत्त्व का प्रबंध-काव्य माना जाता है, जिसमें मिथिला के तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों का यथार्थपरक चित्रण मिलता है। इस काव्य में भृंग-भृंगी संवाद के रूप में कथा प्रस्तुत की गई है, जो प्राचीन काव्य-रूढ़ियों के अनुरूप है।
Information Booster:
अवहट्ट भाषा: यह परवर्ती अपभ्रंश की एक शाखा है, जिसका प्रयोग विद्यापति ने 'कीर्तिलता' और 'कीर्तिपताका' में किया है।
भृंग-भृंगी संवाद: यह शैली प्राचीन काव्य परंपरा में प्रचलित थी, जिसमें नर-मादा भौंरों के संवाद के माध्यम से कथा कही जाती थी।
कीर्तिसिंह: मिथिला के राजा, जिनकी वीरता और उदारता का वर्णन 'कीर्तिलता' में किया गया है।
विद्यापति की अन्य रचनाएँ: 'कीर्तिपताका', 'पदावली', 'पुरुष परीक्षा' आदि, जो विभिन्न भाषाओं में रचित हैं।
मैथिली साहित्य में स्थान: विद्यापति को 'मैथिल कोकिल' कहा जाता है, और उनकी रचनाएँ मैथिली साहित्य की धरोहर हैं।
Additional Knowledge:
चंदवरदायी: ये 12वीं शताब्दी के कवि थे, जिन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' की रचना की, जो पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर आधारित एक महाकाव्य है।
जयदेव: ये 12वीं शताब्दी के संस्कृत कवि थे, जिन्होंने 'गीत गोविंद' की रचना की, जिसमें राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं का वर्णन है।
विद्यापति: 14वीं शताब्दी के मैथिली और संस्कृत कवि, जिन्हें 'मैथिल कोकिल' कहा जाता है। उनकी रचनाओं में भक्ति और शृंगार का सुंदर समन्वय मिलता है।