Correct option is B
'परीक्षा गुरु' के लेखक लाला श्रीनिवास दास हैं। यह हिंदी का पहला उपन्यास माना जाता है, जो 1882 में प्रकाशित हुआ था। 'परीक्षा गुरु' हिंदी साहित्य के आधुनिक युग का आरंभिक उपन्यास है। इस उपन्यास में समाज सुधार, पारिवारिक जीवन, और नैतिक मूल्यों को केंद्र में रखा गया है।
उपन्यास की विशेषताएँ:
समाज सुधार:
- 'परीक्षा गुरु' में उस समय की सामाजिक समस्याओं जैसे अंधविश्वास, अशिक्षा, और नैतिक पतन को उजागर किया गया है।
- यह उपन्यास समाज को नैतिकता और ईमानदारी का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।
भाषा और शैली:
- इस उपन्यास में सरल और सहज हिंदी का प्रयोग किया गया है।
- इसे हिंदी गद्य के विकास में मील का पत्थर माना जाता है।
कथानक:
- कहानी का नायक अपने अनुभवों और गलतियों से सीखकर समाज और अपने परिवार को सुधारने की कोशिश करता है।
Information Booster:
लाला श्रीनिवास दास (1850–1908):
- हिंदी साहित्य के आरंभिक गद्यकार।
- उन्होंने हिंदी गद्य लेखन में आधुनिक उपन्यास विधा को स्थापित किया।
- 'परीक्षा गुरु' उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है।
हिंदी उपन्यास का विकास:
- 'परीक्षा गुरु' हिंदी का पहला उपन्यास है, जिसमें समाज सुधार पर जोर दिया गया।
- बाद में प्रेमचंद जैसे लेखकों ने इस विधा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
अन्य प्रमुख लेखक:
- बालकृष्ण भट्ट: हिंदी गद्य और निबंध साहित्य में योगदान।
- गोपालराम गहमरी: रहस्य और जासूसी कहानियों के लिए प्रसिद्ध।
Additional Knowledge:
'परीक्षा गुरु' का महत्व:
- यह उपन्यास हिंदी उपन्यास लेखन का आधारभूत स्तंभ है।
- इसमें समाज के प्रति लेखक की चेतना और नैतिकता की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
हिंदी उपन्यास का क्रम:
- 'परीक्षा गुरु' के बाद 'चंद्रकांता' (देवकीनंदन खत्री) और 'रंगभूमि' (प्रेमचंद) जैसे उपन्यास हिंदी साहित्य में आए।
- आधुनिक हिंदी उपन्यास का पूर्ण विकास प्रेमचंद के युग में हुआ।
समाज सुधार और उपन्यास:
- 19वीं शताब्दी के हिंदी उपन्यासों का उद्देश्य समाज में सुधार लाना था।
- इसमें नैतिकता, ईमानदारी, और पारिवारिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया गया।