Correct option is C
'शिवराज भूषण' के रचनाकार भूषण हैं। यह ग्रंथ हिंदी साहित्य के रीतिकाल का एक महत्वपूर्ण वीर रस का काव्य है। भूषण 17वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि थे, जो वीर रस के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में छत्रपति शिवाजी और अन्य वीर शासकों की प्रशंसा की है।
'शिवराज भूषण' में छत्रपति शिवाजी के शौर्य, पराक्रम और उनकी राजनीतिक कुशलता का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ शिवाजी के गुणों और उनके द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की महिमा का बखान करता है।
Information Booster:
भूषण (1613–1715):
- रीतिकाल के प्रमुख वीर रस के कवि।
- उन्होंने अपनी कविताओं में वीरता, राष्ट्रभक्ति, और साहस का वर्णन किया।
- उनकी काव्य भाषा ब्रज है, जिसमें ओज और प्रभाव देखने को मिलता है।
'शिवराज भूषण':
- यह छत्रपति शिवाजी को समर्पित वीर रस का काव्य है।
- ग्रंथ में शिवाजी के युद्ध कौशल, धर्म की रक्षा, और प्रशासनिक क्षमता का वर्णन है।
भूषण की अन्य प्रमुख रचनाएँ:
- 'शिवा बावनी': शिवाजी के 52 गुणों का वर्णन।
- छत्रसाल दशक: छत्रसाल दशक,महाकवि भूषण द्वारा रचित एक प्रशास्तिपरक काव्य है.इसमें बुंदेला वीर छत्रसाल के शौर्य का वर्णन किया गया है
भाषा और शैली:
- उनकी रचनाएँ ब्रज भाषा में हैं।
- भाषा में ओज और वीर रस की प्रधानता है।
Additional Knowledge:
चिंतामणि:
- वे रीतिकाल के कवि थे, लेकिन उनकी रचनाएँ वीर रस में नहीं, बल्कि श्रृंगार रस में थीं।
ठाकुर:
- वे भी रीतिकाल के कवि थे और श्रृंगार रस की रचनाएँ करते थे।
वीर रस का महत्त्व:
- रीतिकाल में वीर रस का विशेष स्थान था।
- इस रस में शौर्य, पराक्रम, और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति होती है।
छत्रपति शिवाजी:
- मराठा साम्राज्य के संस्थापक और हिंदवी स्वराज के प्रतीक।
- शिवाजी के प्रति भूषण की कविताएँ उनके सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक हैं।