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    ‘कवि वचन सुधा' पत्रिका का संपादन किसने किया ?
    Question

    ‘कवि वचन सुधा' पत्रिका का संपादन किसने किया ?

    A.

    भारतेंदु हरिश्चन्द्र

    B.

    बदरीनारायण चौधरी प्रेमधन

    C.

    बालकृष्ण भट्ट

    D.

    उपर्युक्त में से एक से अधिक

    E.

    उपर्युक्त में से कोई नहीं

    Correct option is A

    ‘कवि वचन सुधा' पत्रिका का संपादन भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने किया। यह हिंदी साहित्य की एक प्रमुख पत्रिका थी, जिसका प्रकाशन 1868 में प्रारंभ हुआ था। 'कवि वचन सुधा' का उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहित करना और समाज में जागरूकता फैलाना था। भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य में भारतेंदु युग के जनक माने जाते हैं।

    पत्रिका की विशेषताएँ:

    1. प्रकाशन का उद्देश्य:

      • हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार।
      • समाज में सुधारवादी दृष्टिकोण और राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करना।
    2. विषय सामग्री:

      • पत्रिका में कविताएँ, निबंध, और समकालीन विषयों पर लेख प्रकाशित होते थे।
      • इसमें भाषा को सरल, सहज और जनसामान्य के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया।
    3. सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना:

      • पत्रिका में समाज सुधार, देशभक्ति, और स्वाधीनता की भावना को प्रोत्साहित किया गया।

    Information Booster:

    • भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885):

      • हिंदी साहित्य के भारतेंदु युग के जनक।
      • उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, और समाज सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
      • उनकी अन्य पत्रिकाएँ: 'हरिश्चंद्र चंद्रिका'(बाद मे इसका नाम बदलकर हरीश चंद्र मैगज़ीन रखा गया), 'बाला बोधिनी'।
    • ‘कवि वचन सुधा':

      • यह हिंदी भाषा की प्रमुख पत्रिकाओं में से एक थी।
      • इसमें साहित्यिक, सामाजिक, और राजनीतिक विषयों का समावेश होता था।
    • भारतेंदु का साहित्यिक योगदान:

      • उन्होंने कविताएँ, नाटक, और निबंध लिखे।
      • उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ: 'भारत दुर्दशा', 'अंधेर नगरी', 'सत्य हरिश्चंद्र'।

    Additional Knowledge:

    • बद्रीनारायण चौधरी प्रेमधन:

      • वे भारतेंदु युग के प्रमुख कवि और लेखक थे।
    • बालकृष्ण भट्ट:

      • हिंदी गद्य के प्रमुख निबंधकार के रूप मे विख्यात।
      • उनकी प्रमुख पत्रिका: 'हिंदी प्रदीप'।
    • पत्रिकाओं का महत्व:

      • भारतेंदु युग में पत्रिकाओं ने समाज सुधार, भाषा प्रचार, और राष्ट्रीय चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
      • इन पत्रिकाओं के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास को नई दिशा मिली।

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