Correct option is A
'रानी केतकी की कहानी' के रचनाकार इंशा अल्ला खाँ हैं। यह हिंदी गद्य की पहली रचना मानी जाती है, जो 19वीं शताब्दी में लिखी गई थी। इंशा अल्ला खाँ ने इस रचना में उस समय प्रचलित फारसी और उर्दू के प्रभाव से अलग हटकर खड़ी बोली का उपयोग किया। यह कहानी भारतीय साहित्य में गद्य लेखन के शुरुआती प्रयोगों में से एक है।
कहानी की भाषा सरल, सहज और बोलचाल की है, जिससे यह आमजन के लिए सुलभ बनी। 'रानी केतकी की कहानी' में कथा शैली में नयापन है और यह हिंदी गद्य लेखन के विकास में मील का पत्थर मानी जाती है।
Information Booster:
इंशा अल्ला खाँ (1756–1817):
- वे उर्दू और हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और गद्यकार थे।
- उनकी रचनाएँ भाषा के प्रयोग और शैली में नवीनता के लिए प्रसिद्ध हैं।
'रानी केतकी की कहानी':
- इसे हिंदी गद्य का प्रारंभिक उदाहरण माना जाता है।
- इसमें खड़ी बोली में कहानी लिखने का प्रयास किया गया है।
- यह कहानी प्रेम, कर्तव्य और आदर्श पर आधारित है।
भाषा की विशेषता:
- 'रानी केतकी की कहानी' में संस्कृतनिष्ठ और फारसी शब्दों का संयमित प्रयोग है।
- यह कहानी खड़ी बोली हिंदी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
साहित्यिक महत्त्व:
- 'रानी केतकी की कहानी' ने हिंदी गद्य लेखन को एक नई दिशा दी।
- इसे हिंदी साहित्य में गद्य विधा के प्रारंभिक विकास का प्रतीक माना जाता है।
Additional Knowledge:
सदल मिश्र:
- उन्होंने 'नासिकेतोपाख्यान' और अन्य संस्कृतनिष्ठ रचनाएँ लिखीं।
- वे हिंदी साहित्य के प्रारंभिक गद्यकारों में से एक हैं।
सदासुखलाल नियाज:
- वे हिंदी-उर्दू साहित्य में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं।
'रानी केतकी की कहानी' का ऐतिहासिक महत्त्व:
- इसे उस समय लिखा गया जब हिंदी गद्य लेखन प्रारंभिक चरण में था।
- इसने हिंदी में खड़ी बोली को साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में मदद की।