Correct option is B
'उसने कहा था' (1915) के लेखक चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हैं। यह कहानी हिंदी साहित्य की प्रथम मनोवैज्ञानिक और प्रेम कथा मानी जाती है। इसे 1915 में प्रकाशित किया गया था। 'उसने कहा था' को अपनी यथार्थवादी शैली, भावुकता, और मानवीय संवेदनाओं के उत्कृष्ट चित्रण के लिए हिंदी कहानी साहित्य में मील का पत्थर माना जाता है।
कहानी का सारांश:
- यह कहानी अमृतसर के एक बाजार में शुरू होती है, जहाँ नायक और नायिका पहली बार मिलते हैं।
- नायक नायिका से प्रेम करता है, लेकिन परिस्थितियाँ उन्हें अलग कर देती हैं।
- बाद में, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान नायक, जो एक सैनिक है, अपने प्रेम के वचन को निभाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर देता है।
Information Booster:
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (1883–1922):
- वे हिंदी साहित्य के प्रारंभिक दौर के प्रमुख लेखक, पत्रकार और भाषाविद् थे।
- 'उसने कहा था' उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है।
- उन्होंने बहुत कम रचनाएँ कीं, लेकिन उनकी कहानियाँ हिंदी साहित्य में उच्च स्थान रखती हैं।
'उसने कहा था':
- यह हिंदी की पहली मनोवैज्ञानिक कहानी मानी जाती है।
- इसमें प्रेम, त्याग, और वचन की पवित्रता का चित्रण है।
शैली और विशेषताएँ:
- यथार्थवादी और भावनात्मक शैली।
- संवादों और पात्रों के मनोभावों का गहन चित्रण।
- कहानी में घटनाएँ धीरे-धीरे और स्वाभाविक रूप से उभरती हैं।
Additional Knowledge:
सुदर्शन:
- प्रसिद्ध हिंदी कहानीकार, जिनकी प्रसिद्ध कहानी 'हार की जीत' है।
वेद प्रकाश मिश्र:
- हिंदी और उर्दू साहित्य के लेखक।
'उसने कहा था' का साहित्यिक महत्व:
- यह कहानी प्रेम और त्याग की भावना को दर्शाती है।
- इसे हिंदी साहित्य में आधुनिक कहानी का आरंभिक उदाहरण माना जाता है।
- इसमें नायक के चरित्र और उसकी भावनाओं का गहन विश्लेषण किया गया है।
प्रथम विश्व युद्ध और कहानी का संदर्भ:
- कहानी में नायक का बलिदान प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ है, जिससे इसकी ऐतिहासिक प्रासंगिकता बढ़ती है।