Correct option is A
'पृथ्वीराज रासो' के रचनाकार चंदवरदाई हैं, जो 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि और सम्राट पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि थे। यह महाकाव्य पृथ्वीराज चौहान के जीवन, वीरता, और प्रेम कथाओं का विस्तृत वर्णन करता है। चंदवरदाई ने इस काव्य में वीर रस के साथ-साथ श्रृंगार रस का भी सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया है। 'पृथ्वीराज रासो' हिंदी साहित्य के आदिकाल का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है, जिसमें तत्कालीन समाज, संस्कृति, और राजनीति की झलक मिलती है।
Information Booster:
चंदवरदाई: 12वीं शताब्दी के कवि, जिन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' की रचना की। वे पृथ्वीराज चौहान के मित्र और राजकवि थे।
पृथ्वीराज चौहान: दिल्ली और अजमेर के शासक, जिन्होंने 12वीं शताब्दी में शासन किया। उनकी वीरता और संयोगिता के साथ प्रेम कथा प्रसिद्ध है।
'पृथ्वीराज रासो': हिंदी का एक महाकाव्य, जिसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन और कार्यों का वर्णन है। यह ग्रंथ वीर रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।
संयोगिता: कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री, जिनका पृथ्वीराज चौहान के साथ प्रेम और विवाह की कथा 'पृथ्वीराज रासो' में वर्णित है।
महाकाव्य की विशेषताएँ: 'पृथ्वीराज रासो' में 69 सर्ग (अध्याय) हैं और यह लगभग 2,500 पृष्ठों का विस्तृत ग्रंथ है। इसमें वीरता, प्रेम, और युद्ध के वर्णन प्रमुख हैं।
Additional Knowledge:
जगनिक: 'आल्हाखंड' के रचनाकार, जिन्होंने बुंदेलखंड के वीर आल्हा और ऊदल की गाथाओं का वर्णन किया है। यह ग्रंथ भी वीर रस से परिपूर्ण है।
परमाल: चंदेल वंश के राजा, जिनके शासनकाल में महोबा के वीरों की कथाएँ प्रचलित हुईं। 'आल्हाखंड' में उनका उल्लेख मिलता है।