Correct option is B
नाथ संप्रदाय में 9 नाथों की संख्या मानी गई है, जिन्हें नवनाथ कहा जाता है। ये नौ गुरु नाथ परंपरा के प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्होंने हठयोग और साधना के माध्यम से इस संप्रदाय का प्रचार-प्रसार किया। नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक आदिनाथ (भगवान शिव) माने जाते हैं, और उनके बाद मत्स्येंद्रनाथ तथा गोरखनाथ जैसे सिद्ध गुरु हुए, जिन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
नवनाथ: नाथ संप्रदाय के नौ प्रमुख गुरु, जिनके नाम हैं: आदिनाथ, मत्स्येंद्रनाथ, गोरखनाथ, जालंधरनाथ, कन्हपा, चर्पटनाथ, नागार्जुन, भर्तृहरिनाथ, और रीवननाथ।
हठयोग: नाथ संप्रदाय में विकसित योग की एक शाखा, जिसमें शारीरिक आसन, प्राणायाम, और ध्यान के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
गोरखनाथ: मत्स्येंद्रनाथ के शिष्य और नाथ संप्रदाय के प्रमुख गुरु, जिन्होंने हठयोग की विधियों का विस्तार किया और समाज में योग साधना का प्रचार-प्रसार किया।
नाथ संप्रदाय का प्रभाव: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में नाथ संप्रदाय का व्यापक प्रभाव रहा है, विशेषकर उत्तर भारत में, जहां गोरखनाथ के अनुयायी आज भी सक्रिय हैं।
Additional Knowledge:
नाथ संप्रदाय और सूफीवाद: कुछ विद्वानों के अनुसार, नाथ संप्रदाय और सूफीवाद के बीच विचारधारा और साधना पद्धतियों में समानताएँ पाई जाती हैं, जिससे दोनों परंपराओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ है।
नाथ संप्रदाय के तीर्थ स्थल: भारत में कई प्रमुख नाथ तीर्थ स्थल हैं, जैसे गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर, जो नाथ संप्रदाय के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
भर्तृहरि: संस्कृत के प्रमुख वैयाकरण राजा भरथरी, जिन्हें भर्तृहरि के नाम से भी जाना जाता है, उज्जैन के प्रसिद्ध राजा थे। किंवदंतियों के अनुसार, उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर नाथ संप्रदाय में दीक्षा ली और गुरु गोरखनाथ के शिष्य बने।