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एतेषु युग्मेषु विचार्यताम् - 1. तत्पुरुषः : द्वितीयान्तः सदा भवति 2. बहुव्रीहिः : विशेषणं विशेष्यं च अस्ति 3. द्वन्द्वः द्वयोः पदयोः समानत्वं
Question

एतेषु युग्मेषु विचार्यताम् -
1. तत्पुरुषः : द्वितीयान्तः सदा भवति
2. बहुव्रीहिः : विशेषणं विशेष्यं च अस्ति
3. द्वन्द्वः द्वयोः पदयोः समानत्वं भवति
एतेषु कति युग्मानि सम्यक् ?

A.

केवलम् एकः युग्मः

B.

केवलं द्वौ युग्मौ

C.

सर्वे त्रयः युग्माः

D.

न कश्चित्

Correct option is B


परिचय समास वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दो या दो से अधिक पदों को मिलाकर एक नया समर्थ पद (सामासिक पद) बनाया जाता है, जिसमें पदों की विभक्ति का लोप हो जाता है।
व्याख्या
दिए गए तीन युग्मों में से, केवल दो युग्म सही हैं: युग्म 2 और युग्म 3।
· (b) केवलं द्वौ युग्मौ सम्यक् (केवल दो युग्म सही हैं)।
सही युग्मों का विवरण:
2. बहुव्रीहिः : विशेषणं विशेष्यं च अस्ति
· यह युग्म सही है।
· बहुव्रीहि समास में, समास के पद (विशेषण और विशेष्य) किसी अन्य पद (अन्य पदार्थ) का बोध कराते हैं। इस समास में विशेषण और विशेष्य का प्रयोग होता है, जो मिलकर किसी तीसरे अर्थ का विशेषण बन जाते हैं।
· जैसे: पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः (कृष्ण)। यहाँ 'पीतम्' (विशेषण) और 'अम्बरम्' (विशेष्य) मिलकर 'कृष्ण' (अन्य पद) का विशेषण बन रहे हैं।
· इस समास में प्रायः दोनों पदों का अर्थ गौण होकर अन्य पदार्थ की प्रधानता होती है।
3. द्वन्द्वः : द्वयोः पदयोः समानत्वं भवति
· यह युग्म सही है।
· द्वन्द्व समास में, दो या दो से अधिक पदों की समानता/समान प्रधानता होती है, अर्थात् सभी पद समान रूप से मुख्य होते हैं और उनका अर्थ समुच्चय (और) या विकल्प (या) के रूप में लिया जाता है।
· जैसे: रामः च कृष्णः च = रामकृष्णौ। यहाँ राम और कृष्ण दोनों की प्रधानता है।
· पदों का समान महत्व होना ही उनका 'समानत्व' कहलाता है।
रोचक तथ्य
1. (a) तत्पुरुषः : द्वितीयान्तः सदा भवति - यह कथन गलत है।
· तत्पुरुष समास में प्रायः उत्तरपद की प्रधानता होती है।
· इस समास में द्वितीया से सप्तमी तक की किसी भी विभक्ति का प्रयोग पूर्वपद में हो सकता है, इसलिए यह सदा द्वितीयान्त नहीं होता।
· उदाहरण: द्वितीया तत्पुरुष (कृष्णम् आश्रितः = कृष्णाश्रितः), तृतीया तत्पुरुष (शङ्कुलया खण्डः = शङ्कुलाखण्डः), चतुर्थी तत्पुरुष (यूपाय दारु = यूपदारु), आदि।
· (a), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।

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