Correct option is C
परिचय: यह प्रश्न याज्ञवल्क्य स्मृति में
दण्डनीति के विस्तृत विवेचन की उपस्थिति और इसके
स्वरूप (केवल गृह्यसूत्र होना) की जाँच करता है।
व्याख्या:
सही विकल्प
(c) I सत्यम् परन्तु II असत्यम् है। अर्थात्, कथन I सत्य है और कथन II असत्य है।
कथन I : याज्ञवल्क्यस्मृतौ दण्डनयस्य विस्तृतं विवेचनम् अस्ति। (सत्य) ·
यथार्थता:
याज्ञवल्क्य स्मृति में
दण्डनीति (न्यायशास्त्र, कानून और शासन कला) का
विस्तृत विवेचन है।
·
आधार: इस स्मृति का
द्वितीय अध्याय (जिसे
व्यवहाराध्याय कहा जाता है) पूरी तरह से
कानून (व्यवहार),
न्याय,
दण्ड और
मुकदमों के अठारह पदों (अष्टादश व्यवहारपद) को समर्पित है।
·
महत्त्व: इस अध्याय की विषयवस्तु में राजा का कर्तव्य, न्याय की प्रक्रिया, साक्षी (गवाह), लेख्य (दस्तावेज़), और विभिन्न प्रकार के अपराधों के लिए
दण्ड विधान (दण्डनय) शामिल हैं।
·
निष्कर्ष: यह कथन
सत्य है।
कथन II : याज्ञवल्क्यस्मृतिः केवलं गृह्यसूत्रम् अस्ति। (असत्य) ·
यथार्थता: यह कथन
असत्य है।
·
स्मृति का स्वरूप:
याज्ञवल्क्य स्मृति एक
धर्मशास्त्र ग्रंथ है, जिसे
स्मृति या
धर्मसंहिता कहा जाता है। यह
केवल गृह्यसूत्र नहीं है।
·
गृह्यसूत्र:
गृह्यसूत्र वे ग्रंथ हैं जो केवल
घरेलू संस्कारों (जैसे विवाह, उपनयन, सीमांतोन्नयन) और अनुष्ठानों पर केंद्रित होते हैं (जैसे
पारस्कर गृह्यसूत्र)।
·
याज्ञवल्क्य स्मृति का विभाजन: याज्ञवल्क्य स्मृति का विभाजन तीन अध्यायों में है:
1.
आचाराध्याय (धार्मिक आचार और कर्मकांड)
2.
व्यवहाराध्याय (कानून और न्याय-दण्डनीति)
3.
प्रायश्चित्ताध्याय (पाप और प्रायश्चित)
·
निष्कर्ष: चूँकि इसमें आचार, व्यवहार और प्रायश्चित तीनों का समावेश है, यह
गृह्यसूत्र की तुलना में एक
विस्तृत धर्मशास्त्र संहिता है।