Correct option is A
यह प्रश्न भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों के वर्गीकरण से सम्बंधित है जिन्हें उनके निर्माण के तथा ध्वनि उत्पादन के तरीके के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है-
ततः तन्त्रीगतं ज्ञेयं, अवनद्धम् तु पौष्करं।
घनं तालगतं विद्यात्, शुषिरं वंशिगतं तथा।।
यह श्लोक संगीत के चार मुख्य प्रकार के वाद्य यंत्रों का वर्णन करता है:
तन्त्रीगतं ज्ञेयं: "तंत्री" का अर्थ है तार। यानी, जो वाद्य यंत्र तारों से बजाए जाते हैं, जैसे वीणा, सितार, आदि।
अवनद्धम् तु पौष्करं: "अवनद्ध" का अर्थ है ढका हुआ। इसमें वे वाद्य यंत्र आते हैं, जिनमें चमड़े का प्रयोग होता है, जैसे मृदंग, ढोल, तबला, आदि। इन्हें तालाघात वाद्य भी कहते हैं।
घनं तालगतं विद्यात्: "घन" का अर्थ है ठोस धातु। इसमें वे वाद्य आते हैं जो धातु से बने होते हैं और जिन्हें आपस में टकराकर बजाया जाता है, जैसे झांझ, मंजीरा, आदि।
शुषिरं वंशिगतं तथा: "शुषिर" का अर्थ है खोखला। इसमें वे वाद्य यंत्र आते हैं, जिनमें हवा का उपयोग होता है, जैसे बांसुरी, शहनाई, शंख, आदि।