Correct option is A
परिचय: यह प्रश्न व्याकरण के प्राथमिक उद्देश्य और भाषा की मौलिक प्रकृति—ध्वनि तथा अर्थ दोनों स्तरों पर परिवर्तनशील होना—की जाँच करता है।
व्याख्या:
सही विकल्प
(a) I & II उभे अपि सत्ये है। अर्थात्, दोनों ही कथन सत्य हैं।
कथन I : व्याकरणस्य मुख्यं लक्ष्यं भाषायाः शिक्षणम् अस्ति। (सत्य) ·
यथार्थता: यह कथन
सत्य है।
·
व्याकरण का उद्देश्य: व्याकरण का मूल उद्देश्य भाषा के
शुद्ध स्वरूप को जानना और सिखाना है। यह भाषा के नियमों का विश्लेषण करके, उसे व्यवस्थित रूप से
सिखाने (
शिक्षणम्) का कार्य करता है, ताकि
शब्दों का
साधुत्व (शुद्धता) सिद्ध हो सके। पतञ्जलि ने महाभाष्य में
रक्षोहागमलवसन्देहाः (रक्षा, ऊह, आगम, लघु और असंदेह) जैसे प्रयोजनों में भी मुख्य रूप से भाषा की रक्षा और उसके
प्रयोग (शिक्षण का एक भाग) को ही बल दिया है।
·
निष्कर्ष: व्याकरण का मुख्य कार्य भाषा को नियमबद्ध करके उसका शिक्षण करना है।
कथन II : भाषायाः ध्वनिरूपतया अर्थरूपतया च परिवर्तनं सम्भवति। (सत्य) ·
यथार्थता: यह कथन
सत्य है।
·
भाषा की प्रकृति: भाषा की प्रकृति
परिवर्तनशील होती है।
·
ध्वनिगत परिवर्तन: समय के साथ ध्वनियाँ बदल जाती हैं (जैसे संस्कृत का (श/स) प्राकृत में (ह) हो गया, या
कर्ण से
कान बनना)। यह
ध्वनिरूपतया परिवर्तन है।
·
अर्थगत परिवर्तन: शब्दों का अर्थ भी बदल जाता है ।
·
निष्कर्ष: भाषा ध्वनियों और अर्थ दोनों स्तरों पर निरंतर परिवर्तित होती रहती है।