Correct option is A
Correct Option: (a) केवल C और D
INTRODUCTION
काव्यशास्त्र में शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्तियों को 'शब्दशक्ति' कहा जाता है (अभिधा, लक्षणा, व्यंजना)। जब अभिधा शक्ति द्वारा सांकेतिक अर्थ (मुख्यार्थ) का बोध न होकर किसी बाधा के कारण उससे संबंधित अन्य अर्थ (लक्ष्यार्थ) लिया जाता है, तब वहाँ लक्षणा शब्दशक्ति कार्य करती है।
INFORMATION BOOSTER
कथनों का विश्लेषण:
· कथन C असत्य है: जहाँ रूढ़ि (परंपरा) के कारण लक्ष्यार्थ का बोध हो, वहाँ 'रूढ़ा लक्षणा' होती है (न कि प्रयोजनवती)।
· कथन D असत्य है: जहाँ किसी विशेष प्रयोजन (उद्देश्य) के कारण लक्ष्यार्थ का बोध कराया जाए, वहाँ 'प्रयोजनवती लक्षणा' होती है (न कि रूढ़ा)।
कथन A, B और E लक्षणा शब्दशक्ति की सही परिभाषा और विशेषताएं प्रस्तुत करते हैं।
ADDITIONAL KNOWLEDGE
प्रयोजनवती लक्षणा के दो मुख्य भेद होते हैं: गौणी और शुद्धा। रूढ़ा लक्षणा का प्रसिद्ध उदाहरण है: "पंजाब वीर है" (यहाँ पंजाब का अर्थ पंजाब के निवासी हैं)। प्रयोजनवती लक्षणा का उदाहरण: "गंगा पर घर है" (यहाँ गंगा के तट पर घर होना अभिप्राय है)।