Correct option is D
Correct Option: (d) C, B, E, D, A
INTRODUCTION
जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित नाटक 'स्कंदगुप्त' (1928 ई.) ऐतिहासिक और नाटकीय दृष्टि से हिंदी साहित्य की एक कालजयी कृति है। इस नाटक में राष्ट्रप्रेम, व्यक्तिगत त्याग और गीति-तत्व का सुंदर समन्वय मिलता है। नाटक की प्रमुख पात्रा 'देवसेना' के गीत उसके जीवन के विभिन्न मानसिक और भावनात्मक चरणों को दर्शाते हैं।
INFORMATION BOOSTER
नाटक के दृश्यों के अनुसार देवसेना के गीतों का क्रमिक प्रयोग:
1. भरा नैनों में मन में रूप (C): प्रथम अंक (द्वितीय दृश्य)
2. घने प्रेम-तरु तले (B): द्वितीय अंक (द्वितीय दृश्य)
3. शून्य गगन में खोजता जैसे चन्द्र निराश (E): तृतीय अंक (प्रथम दृश्य)
4. देश की दुर्दशा निहारोगे (D): चतुर्थ अंक (पंचम दृश्य)
5. आह! वेदना मिली विदाई (A): पंचम अंक (द्वितीय दृश्य)
अतः सही क्रम C, B, E, D, A है।
ADDITIONAL KNOWLEDGE
'आह! वेदना मिली विदाई' देवसेना का आत्म-निवेदन तथा संपूर्ण नाटक का सबसे कारुणिक एवं प्रसिद्ध गीत है, जो उसके त्याग और जीवन-संग्राम के अंतिम चरण का प्रतीक है। नाटक में देवसेना के अतिरिक्त विजया और देवकी के गीत भी महत्वपूर्ण हैं।