Correct option is C
सही उत्तर: (C) सखी + उचित = सख्युचित
उत्तर की व्याख्या:
यह
यण संधि का उदाहरण है। "सखी" और "उचित" शब्दों में
'इ' और
'उ' के संयोजन से
'य' का रूप उत्पन्न होता है। इसलिए "सखी" और "उचित" मिलकर
"सख्युचित" बनते हैं। यह यण संधि के नियम के अनुसार है, जिसमें
इ के बाद कोई अन्य स्वर आने पर
'य' बन जाता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प |
संधि प्रकार |
संधि और व्याख्या |
निष्कर्ष |
| (A) कवि + इन्द्र = कवीन्द्र |
दीर्घ संधि |
"कवि" और "इन्द्र" में दीर्घ संधि होनी चाहिए, लेकिन यहाँ "इ" और "इ" मिलकर दीर्घ "ई" नहीं बना।इसलिए संधि गलत है। |
गलत |
| (B) राम + ईश = रमेश |
गुण संधि |
"राम" और "ईश" में गुण संधि होनी चाहिए, लेकिन संधि विच्छेद सही नहीं है। "रमेश" का सही संधि विच्छेद रमा+ईश होगा। |
गलत |
| (C) सखी + उचित = सख्युचित |
यण संधि |
'इ' के बाद 'उ' मिलने पर 'य' बनता है, जिससे "सख्युचित" शब्द बनता है। |
सही |
| (D) सत् + नारी = सद्भारी |
व्यंजन संधि |
"सत्" और "नारी" में व्यंजन संधि होनी चाहिए, लेकिन "सद्भारी" नहीं बनता। |
गलत |
यहाँ संधि के प्रकारों, उनके नियमों, उदाहरणों और संधि विच्छेद को एक सारणी में प्रस्तुत किया गया है:
| संधि का प्रकार |
नियम |
उदाहरण |
संधि विच्छेद |
| 1. दीर्घ संधि |
दो सजातीय स्वरों के मिलने से दीर्घ स्वर बनता है। |
पुस्तकालय |
पुस्तक + आलय |
| विद्यार्थी |
विद्या + अर्थी |
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| महात्मा |
महा + आत्मा |
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| 2. गुण संधि |
‘अ’ या ‘आ’ के साथ इ/ई हो तो ‘ए’, उ/ऊ हो तो ‘ओ’, और ऋ हो तो ‘अर’ बनता है। |
नरेंद्र |
नर + इंद्र |
| ज्ञानोपदेश |
ज्ञान + उपदेश |
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| महर्षि |
महा + ऋषि |
||
| 3. वृद्धि संधि |
‘अ’/आ’ के साथ ए/ऐ हो तो ‘ऐ’ और ओ/औ हो तो ‘औ’ बनता है। |
सदैव |
सदा + एव |
| वनौषधि |
वन + औषधि |
||
| महौदार्य |
महा + औदार्य |
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| 4. यण संधि |
इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है। |
इत्यादि |
इति + आदि |
| स्वागत |
सु + आगत |
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| अध्ययन |
अधि + अयन |
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| 5. अयादि संधि |
ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव, और औ का आव बनता है। |
नयन |
ने + अन |
| नाविक |
नौ + इक |
||
| पवित्र |
पो + इत्र |
सही उत्तर (C) सखी + उचित = सख्युचित है।