Correct option is B
सही उत्तर: (B) अजंत = अज + अन्त
व्याख्या:
·
अजन्त शब्द का सही संधि-विच्छेद
अच् + अन्त है, न कि-
अज + अन्त।
· यह एक व्यंजन संधि का उदाहरण है, जहाँ 'अ' और 'च' के संयोग से 'ज' का निर्माण होता है।
·
अज +
अन्त से 'अजन्त' नहीं बन सकता क्योंकि यह संधि गलत है।
विकल्पों का विश्लेषण सारिणी में:
| विकल्प |
विश्लेषण |
संगत/असंगत |
| न्यून = नि + ऊन |
यह संधि सही है। 'नि' और 'ऊन' मिलकर 'न्यून' शब्द बनाते हैं। |
संगत |
| अजंत = अज + अन्त |
यह संधि गलत है। 'अज' और 'अन्त' के संयोग से 'अजन्त' शब्द नहीं बनता। सही संधि 'अच् + अन्त' है। |
असंगत |
| मतैक्य = मत + ऐक्य |
यह संधि सही है। 'मत' और 'ऐक्य' मिलकर 'मतैक्य' शब्द बनाते हैं। |
संगत |
| महर्षि = महा + ऋषि |
यह संधि सही है। 'महा' और 'ऋषि' मिलकर 'महर्षि' शब्द बनाते हैं। |
संगत |
व्यंजन संधि के प्रमुख नियम:
व्यंजन संधि में, व्यंजन के बाद यदि स्वर या किसी अन्य व्यंजन का मेल होता है, तो वह विभिन्न प्रकार से परिवर्तन करते हैं। यहाँ पर मुख्य नियमों का विवरण दिया गया है:
1. वर्गीय व्यंजन संधि:
कृ, व्, ट्, तू, प के बाद यदि कोई स्वर या वर्ग के तीसरे या चौथे वर्ण (जैसे 'य', 'र', 'ल', 'व') आए तो पहले वर्ण का परिवर्तन होता है।
उदाहरण के तौर पर:
क् → ग (क का ग में रूपांतरण)
च् → ज (च का ज में रूपांतरण)
ट् → ड (ट का ड में रूपांतरण)
त् → द (त का द में रूपांतरण)
प् → व (प का व में रूपांतरण)
उदाहरण:
· दिक् + अम्बर = दिगम्बर (क् + ग के रूप में ग का प्रयोग)
· वाक् + ईश = वागीश (क् + ईश के रूप में ग का प्रयोग)
· अच् + अन्त = अजन्त (च् + अ के रूप में ज का प्रयोग)
निष्कर्ष:
· अजंत शब्द का सही संधि-विच्छेद अच् + अन्त है, जबकि विकल्प (B) में अज + अन्त दिया गया है, जो गलत है।
· इसलिए सही उत्तर: (B) अजंत = अज + अन्त
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