Correct option is B
सही उत्तर:B रूपक अलंकार
व्याख्या:
प्रदत्त जानकारी के अनुसार रूपक अलंकार अर्थालंकार का एक प्रकार है। इसमें उपमेय को उपमान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
रूपक अलंकार की विशेषताएँ:
- इसमें उपमेय और उपमान के बीच इतनी गहरी समानता होती है कि उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाता है।
- इसमें एक वस्तु को दूसरी वस्तु के रूप में कल्पित किया जाता है।
- यह अर्थालंकार का एक प्रमुख प्रकार है।
उदाहरण:
"मुख चंद्रमा है।"
- यहाँ मुख (उपमेय) को चंद्रमा (उपमान) के रूप में कहा गया है।
"धरती पर सरसों फूली, मानो धरती ने पीली चूनर ओढ़ ली।"
- यहाँ सरसों के फूलों को धरती की चूनर के रूप में रूपायित किया गया है।
"सूरज के रथ का पहिया ठहरा।"
- यहाँ सूरज को रथ के रूप में कल्पित किया गया है।
अलंकार के भेद:
अर्थालंकार:
- उपमा अलंकार
- रूपक अलंकार
- उत्प्रेक्षा अलंकार
- विरोधाभास अलंकार
- विभावना अलंकार
शब्दालंकार:
- अनुप्रास अलंकार
- यमक अलंकार
- श्लेष अलंकार
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
A यमक अलंकार: शब्दालंकार है। इसमें एक शब्द का एकाधिक बार प्रयोग होता है, लेकिन अर्थ भिन्न होते हैं।
- उदाहरण: "चारु चंद्र की चंचल किरणें।"
C वक्रोक्ति अलंकार: यह शब्दों में वक्रता (चातुर्य) का प्रयोग करता है।
- उदाहरण: "सागर का पानी भी अनमोल है, प्यासे के लिए केवल खारा।"
D श्लेष अलंकार: इसमें एक ही शब्द के अनेक अर्थ होते हैं।
- उदाहरण: "कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।"
निष्कर्ष:
रूपक अलंकार अर्थालंकार का प्रकार है। इसमें उपमेय को उपमान के रूप में व्यक्त किया जाता है।
अतः सही उत्तर है: B रूपक अलंकार।
अतः सही उत्तर है: B रूपक अलंकार।