Correct option is D
सही उत्तर: (d) संदेह
संदेह अलंकार वह अलंकार है जिसमें उपमेय और उपमान के बीच संशय या अनिश्चितता का भाव उत्पन्न होता है।
यह अलंकार तब प्रयोग होता है जब पाठक या श्रोता यह तय करने में असमर्थ हो कि वर्णन किए गए वस्तु में वास्तविक गुण कौन-सा है, या किसकी तुलना किससे हो रही है।
संदेह अलंकार का उदाहरण:
"यह चंद्रमा है या मुख?"
यहाँ मुख और चंद्रमा के बीच संशय उत्पन्न हो रहा है।
- उपमेय: मुख
- उपमान: चंद्रमा
"यह स्वर्ण है या सूरज की रश्मि?"
यहाँ स्वर्ण और सूरज की रश्मि के बीच संशय उत्पन्न हो रहा है।
अतिरिक्त जानकारी:
यमक:
यमक अलंकार में एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं।
यह उपमेय-उपमान के संशय से संबंधित नहीं है।
उदाहरण:
"सारा संसार सो रहा है, केवल तारे सो रहे हैं।"
श्लेष:
श्लेष अलंकार में एक ही शब्द में दो या अधिक अर्थ समाहित होते हैं।
यह भी उपमेय-उपमान के संशय से संबंधित नहीं है।
उदाहरण:
"सागर में गहरी बात है।"
उपमा:
उपमा अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच समानता का स्पष्ट संबंध होता है।
इसमें संशय नहीं, बल्कि स्पष्ट तुलना होती है।
उदाहरण:
"मुख चंद्रमा के समान है।"