Correct option is D
सही उत्तर: (d) उत्प्रेक्षा
पायी अपूर्वथिरता मृदु वायु ने भी, मानो अचंचल विमोहित हो बनी थी। इस पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है
उत्प्रेक्षा अलंकार का विवरण:
उत्प्रेक्षा अलंकार वह अलंकार है जिसमें किसी वस्तु या घटना के बारे में ऐसा वर्णन किया जाता है, मानो वह वस्तु/घटना संभव हो रही हो। इसमें "मानो," "जैसे," "प्रायः" आदि शब्दों का प्रयोग होता है, जो संभावना और कल्पना का बोध कराते हैं।
पंक्ति का विश्लेषण:
"पायी अपूर्व थिरता मृदु वायु ने भी, मानो अचंचल विमोहित हो बनी थी।"
- यहाँ "मानो" शब्द का प्रयोग यह संकेत करता है कि मृदु वायु (कोमल हवा) स्थिर हो गई है, मानो वह अचंचल (हिली न हो) और विमोहित (मोहित) हो गई हो।
- यह पंक्ति संभावना और कल्पना का भाव उत्पन्न करती है, जो उत्प्रेक्षा अलंकार की विशेषता है।
अतिरिक्त जानकारी:
श्लेष:
श्लेष अलंकार में एक शब्द के दो या अधिक अर्थ होते हैं।- यहाँ ऐसा कोई शब्द प्रयोग नहीं हुआ है, इसलिए यह विकल्प गलत है।
यमक:
यमक अलंकार में एक ही शब्द की पुनरावृत्ति होती है, लेकिन अर्थ अलग-अलग होते हैं।- इस पंक्ति में किसी शब्द की पुनरावृत्ति नहीं है, इसलिए यह भी गलत है।
विभावना:
विभावना अलंकार में निर्जीव वस्तु को सजीव मानकर कार्य करते हुए दिखाया जाता है।- इस पंक्ति में वायु को सजीव कल्पना नहीं दी गई है, बल्कि संभावना और कल्पना का भाव दिया गया है, जो उत्प्रेक्षा है।
इसलिए, यह पंक्ति उत्प्रेक्षा अलंकार का सटीक उदाहरण है।