Correct option is B
सही उत्तर: (B) राकेश = राक + ईश
उत्तर की व्याख्या:
(B) राकेश = राक + ईश में संधि गलत है। यहाँ
राकेश शब्द का संधि-विच्छेद
राक + ईश नहीं हो सकता। सही संधि-विच्छेद
राका + ईश है, जिसमें
गुण संधि होती है। 'आ' और 'ई' के मिलन से 'ए' बनता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प |
संधि-विच्छेद |
संधि का प्रकार |
विवरण |
| (A) |
धनेश = धन + ईश |
गुण संधि |
'धन' और 'ईश' के मिलन से 'धनेश' बनता है। इसमें 'अ' और 'ई' मिलकर 'ए' बनते हैं। |
| (B) |
राकेश = राक + ईश |
गलत संधि |
सही संधि-विच्छेद 'राका + ईश' है। इसमें 'आ' और 'ई' मिलकर 'ए' बनता है। |
| (C) |
उरगारि = उरग + अरि |
दीर्घ संधि |
'उरग' और 'अरि' के मिलन से 'उरगारि' बनता है। इसमें 'अ' और 'अ' मिलकर 'आ' बनते हैं। |
| (D) |
अतएव = अतः + एव |
विसर्ग संधि |
'अतः' और 'एव' के मिलन से 'अतएव' बनता है, इसमे विसर्ग संधि है। |
यहाँ संधि के प्रकारों, उनके नियमों, उदाहरणों और संधि विच्छेद को एक सारणी में प्रस्तुत किया गया है:
| संधि का प्रकार |
नियम |
उदाहरण |
संधि विच्छेद |
| 1. दीर्घ संधि |
दो सजातीय स्वरों के मिलने से दीर्घ स्वर बनता है। |
पुस्तकालय |
पुस्तक + आलय |
| विद्यार्थी |
विद्या + अर्थी |
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| महात्मा |
महा + आत्मा |
||
| 2. गुण संधि |
‘अ’ या ‘आ’ के साथ इ/ई हो तो ‘ए’, उ/ऊ हो तो ‘ओ’, और ऋ हो तो ‘अर’ बनता है। |
नरेंद्र |
नर + इंद्र |
| ज्ञानोपदेश |
ज्ञान + उपदेश |
||
| महर्षि |
महा + ऋषि |
||
| 3. वृद्धि संधि |
‘अ’/आ’ के साथ ए/ऐ हो तो ‘ऐ’ और ओ/औ हो तो ‘औ’ बनता है। |
सदैव |
सदा + एव |
| वनौषधि |
वन + औषधि |
||
| महौदार्य |
महा + औदार्य |
||
| 4. यण संधि |
इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है। |
इत्यादि |
इति + आदि |
| स्वागत |
सु + आगत |
||
| अध्ययन |
अधि + अयन |
||
| 5. अयादि संधि |
ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव, और औ का आव बनता है। |
नयन |
ने + अन |
| नाविक |
नौ + इक |
||
| पवित्र |
पो + इत्र |
सभी विकल्प सही हैं, सिवाय (B) के, जहाँ संधि-विच्छेद गलत है। (B) में सही संधि-विच्छेद 'राका + ईश' होना चाहिए, और इसमें गुण संधि होती है।