Correct option is C
Ans. (c):
‘दीपक’ एवं ‘उल्लेख’ अलंकारों के अंतर्गत आते हैं।
दीपक अलंकार:
जहाँ उपमेय और उपमान दोनों का एक समान धर्म वर्णित हो, वहाँ दीपक अलंकार होता है।
उदाहरण:
देखै तें मन भरै, तन की मिटे न भूख।
बिन चखै रस नहीं मिले, आम कामिनी ऊख।
उल्लेख अलंकार:
जब किसी वस्तु का अनेक प्रकार से वर्णन किया जाए, तब उल्लेख अलंकार होता है।
उदाहरण:
1. तू रूप है किरण में, सौंदर्य है सुमन में,
तू प्राण है पवन में, विस्तार है गगन में.
2. हरीतिमा का सुविशाल सिंधु-सा, मनोज्ञता की स्मरणीय भूमि-सा,
विचित्रता का शुभ सिध्द पीठ-सा, प्रशांत वृन्दावन दर्शनीय था.
Information Booster:
वैदर्भी रीति भारतीय काव्यशास्त्र में एक महत्वपूर्ण शैली है, जिसका संबंध विदर्भ प्रदेश से है। आचार्य वामन ने 'रीति' को काव्य की आत्मा माना और इसके तीन भेद बताए: वैदर्भी, गौड़ी, और पाञ्चाली। वैदर्भी रीति को 'ललिता' भी कहा जाता है, जबकि आचार्य मम्मट ने इसे 'उपनागरिका' नाम दिया है।
वैदर्भी रीति की विशेषताएँ:
माधुर्य व्यंजक वर्णों का प्रयोग: इस रीति में मधुर ध्वनि वाले वर्णों का समावेश होता है, जो काव्य में कोमलता और सुकुमारता लाते हैं।
समास रहित ललित पद रचना: वैदर्भी रीति में समासों का न्यूनतम प्रयोग होता है, जिससे भाषा सरल और प्रवाहमयी बनती है।
संयुक्ताक्षरों का अभाव: इस शैली में संयुक्ताक्षरों का प्रयोग कम होता है, जिससे पाठ सुगम और श्रुतिमधुर बनता है।
Additional Knowledge:
'रोमांच'एक सात्त्विक अनुभाव है। सात्त्विक अनुभाव वे शारीरिक प्रतिक्रियाएँ हैं जो मनोभावों की तीव्रता के कारण स्वाभाविक रूप से प्रकट होती हैं। भरतमुनि के अनुसार, सात्त्विक अनुभाव आठ प्रकार के होते हैं:
- स्तंभ: शरीर का स्थिर हो जाना।
- स्वेद: पसीना आना।
- रोमांच: रोमों का खड़ा हो जाना।
- स्वरभंग: आवाज का बदलना या टूटना।
- कंप: शरीर का कांपना।
- विवर्णता: चेहरे का रंग बदलना।
- अश्रु: आँसू आना।
- प्रलय: मूर्छा या बेहोशी।
जब किसी स्थायी भाव (जैसे रति, शोक, क्रोध आदि) की तीव्रता बढ़ती है, तो ये सात्त्विक अनुभाव स्वाभाविक रूप से प्रकट होते हैं। उदाहरण के लिए, अत्यधिक प्रेम या भक्ति की अवस्था में शरीर में रोमांच (रोमों का खड़ा होना) देखा जा सकता है।
उदाहरण:
"सुनत सुभाउ सनेह बस, पुलक गात रघुनाथ।"