Correct option is B
ans.(b)
भारतीय काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्यों ने काव्य की परिभाषा अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। निम्नलिखित आचार्यों के संस्कृत में कथन और उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं:
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आचार्य कुंतक
- प्रमुख रचना:वक्रोक्तिजीवितम्
- काव्य की परिभाषा: कुंतक ने काव्य की परिभाषा में 'वक्रोक्ति' को प्रमुखता दी है। उनके अनुसार, काव्य वह है जिसमें वक्रोक्ति (कलात्मक अभिव्यक्ति) का समावेश हो।
आचार्य राजशेखर
- प्रमुख रचनाएँ:काव्यमीमांसा, बालरामायण, बालभारत, विद्धशालभंजिका, कर्पूरमंजरी
- काव्य की परिभाषा: "शब्दार्थयोर्यथासंयोगः काव्यम्"
- अनुवाद: शब्द और अर्थ के उचित संयोग से काव्य की उत्पत्ति होती है।
आचार्य भोजराज
- प्रमुख रचनाएँ:सरस्वतीकण्ठाभरणम्, शृंगारप्रकाश
- काव्य की परिभाषा: "शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्"
- अनुवाद: शब्द और अर्थ का सम्यक् संयोग ही काव्य है।
आचार्य विश्वनाथ
- प्रमुख रचना:साहित्यदर्पणम्
- काव्य की परिभाषा: "वाक्यं रसात्मकं काव्यम्"
- अनुवाद: वह वाक्य जिसमें रस की प्रधानता हो, काव्य कहलाता है।