Correct option is A
सही उत्तर: (a) रूपक
विस्तृत उत्तर:
- जब किसी अप्रस्तुत (जो मुख्य रूप से उपस्थित नहीं है) का प्रस्तुत (जो मुख्य रूप से उपस्थित है) में निषेध रहित आरोप किया जाता है, तब उसे रूपक अलंकार कहते हैं।
- सरल शब्दों में, जब उपमेय और उपमान के बीच ऐसा संबंध हो कि उनमें अंतर करना मुश्किल हो जाए, तब रूपक अलंकार बनता है।
उदाहरण:
- "चाँदनी रात का आँचल फैला हुआ है।"
- यहाँ 'चाँदनी रात' को 'आँचल' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- "बालों की काली घटाएँ लहराईं।"
- बालों को 'घटाएँ' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- विभावना: यह अलंकार तब होता है जब असंभव को संभव दिखाया जाता है।
- उदाहरण: "पत्थर बोल उठे।"
- दीपक: यह अलंकार तब होता है जब एक क्रिया या भाव कई वस्तुओं पर लागू होता है।
- उदाहरण: "सूरज जलाए दिन को, चाँदनी रात को।"
- असंगति: जब काव्य में जानबूझकर विरोधाभास या असंगति उत्पन्न की जाती है।
- उदाहरण: "सूरज ठंडा जलता है।"
इसलिए, अप्रस्तुत का प्रस्तुत में निषेध रहित आरोप रूपक अलंकार कहलाता है।