Correct option is C
कार्यों को क्रियान्वयन की दृष्टि से क्रमबद्ध करने पर सबसे पहले पाठ्यक्रम के उद्देश्यों का उल्लेख करना आवश्यक है, क्योंकि यह पाठ की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट करता है। इसके बाद टॉपिक, थीम और स्थितियों को चिह्नित करना आता है, ताकि पाठ की रूपरेखा तैयार हो सके। इसके बाद, इन उद्देश्यों और विषयों के आधार पर अधिगम गतिविधि की अभिकल्पना करना आवश्यक होता है। अंत में, इन सभी चरणों के बाद शिक्षक निर्देश देना, मॉनीटरिंग करना और विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन करना शुरू करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी गतिविधियाँ सही ढंग से कार्यान्वित हो रही हैं और विद्यार्थी अपेक्षित प्रगति कर रहे हैं।
Information Booster
- पाठ्यक्रम के उद्देश्यों का स्पष्ट उल्लेख शिक्षण प्रक्रिया को दिशा प्रदान करता है।
- विषय और स्थिति का चयन पाठ को आकर्षक और संप्रेषणीय बनाने में सहायक होता है।
- गतिविधि की अभिकल्पना से विद्यार्थियों के लिए एक सक्रिय और सहभागिता युक्त अधिगम अनुभव मिलता है।
- निर्देश और मॉनीटरिंग से शिक्षक को प्रगति का आकलन करने और आवश्यकतानुसार सुधार करने का अवसर मिलता है।
- यह दृष्टिकोण एक संरचित और प्रभावी शिक्षण प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है।
Additional Knowledge
- अधिगम गतिविधि की अभिकल्पना करना: यह चरण तब आता है जब उद्देश्यों और विषयों का निर्धारण हो चुका होता है, जिससे गतिविधियाँ पाठ के लक्ष्यों के अनुरूप बनाई जा सकें।
- निर्देश देना, मॉनीटरिंग और प्रगति का आकलन: यह अंतिम चरण है, जिसमें गतिविधियों के क्रियान्वयन के बाद शिक्षक विद्यार्थियों की प्रगति का निरीक्षण करते हैं और उनकी सहायता करते हैं।
- पाठ्यक्रम के उद्देश्यों का उल्लेख करना: यह शिक्षण प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है, जिसमें पाठ की दिशा और लक्ष्य निर्धारित होते हैं।
- टॉपिक, थीम और स्थितियों को चिह्नित करना: उद्देश्यों के बाद, पाठ्यक्रम के विषय और थीम को चिह्नित करना आवश्यक होता है, ताकि पाठ्य सामग्री को रोचक और प्रासंगिक बनाया जा सके।