Correct option is D
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, व्यवहार और
समग्र विकास का निरंतर आकलन किया जाता है। यह प्रणाली 2009 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के
तहत पेश की गई थी। इसका उद्देश्य वर्ष में केवल एक या दो बार परीक्षा लेने के बजाय विद्यार्थियों का निरंतर
मूल्यांकन करना है। साथ ही, यह केवल पाठ्य-संबंधी जानकारी तक सीमित न रहकर व्यक्तित्व विकास पर
भी ध्यान देती है।
हालांकि, CCE की कई विशेषताएँ हैं, जैसे:
· विद्यार्थियों का नियमित मूल्यांकन।
· विद्यार्थियों को उनकी कमियों का पता लगना।
· अभिभावकों को प्रगति की जानकारी देना।
इसके बावजूद, इसका एक महत्वपूर्ण दोष यह है कि यह प्रणाली तभी सफलतापूर्वक लागू की जा सकती है,
जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो। यदि एक शिक्षक पर बहुत अधिक विद्यार्थी हों, तो प्रत्येक छात्र के
प्रदर्शन का सही आकलन करना और फीडबैक देना कठिन हो जाता है। इससे न केवल शिक्षकों पर
अतिरिक्त कार्य का बोझ बढ़ता है, बल्कि मूल्यांकन की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
Information Booster:
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अधिक समय की आवश्यकता: CCE में विद्यार्थियों के निरंतर मूल्यांकन के कारण समय अधिक लगता है।
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शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ: शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य के अलावा अन्य प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं।
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कम विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात: CCE का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब एक शिक्षक पर विद्यार्थियों की संख्या कम हो।
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व्यवस्थित प्रक्रिया: CCE के लिए शिक्षकों को नियमित रूप से विद्यार्थियों की प्रगति का अवलोकन करना होता है।
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प्रशिक्षण की जरूरत: शिक्षकों को CCE प्रणाली के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
CCE की विशेषताएँ:
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निरंतर मूल्यांकन: वर्षभर में कई बार मूल्यांकन किया जाता है।
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व्यापक मूल्यांकन: ज्ञानात्मक, भावनात्मक, और व्यवहारिक पक्षों का आकलन।
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व्यक्तिगत विकास: प्रत्येक विद्यार्थी की विशेष जरूरतों का ध्यान रखना।
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परीक्षा भय दूर करना: परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए नियमित मूल्यांकन।
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अभिभावकों की सहभागिता: अभिभावकों को बच्चों की प्रगति की जानकारी देना।
CCE के दोष:
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अधिक समय लगना: मूल्यांकन की प्रक्रिया में अधिक समय व्यतीत होता है।
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शिक्षकों पर बोझ: शिक्षकों के लिए अतिरिक्त कार्यभार बढ़ जाता है।
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कम प्रभावी क्रियान्वयन: जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात अधिक हो तो क्रियान्वयन कठिन हो जाता है।
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विशेष प्रशिक्षण की मांग: शिक्षकों को CCE को लागू करने के लिए उचित प्रशिक्षण चाहिए।
Additional Knowledge:
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इसमें विद्यार्थियों का निरंतर मूल्यांकन होता रहता है: यह CCE की एक विशेषता है, न कि दोष। इससे विद्यार्थियों की प्रगति का लगातार आकलन किया जाता है।
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विद्यार्थियों को अपनी कमियों का निरंतर ज्ञान होता रहता है: यह CCE का लाभ है, क्योंकि इससे छात्र अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं।
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इसमें अभिभावकों को विद्यार्थी की निरंतर प्रगति की जानकारी होती रहती है: यह CCE की विशेषता है, जिससे अभिभावकों को विद्यार्थियों की प्रगति की जानकारी मिलती रहती है।
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यह प्रणाली तभी लागू की जा सकती है जब विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात कम हो: यह CCE का एक महत्वपूर्ण दोष है। कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने पर इस प्रणाली का सही क्रियान्वयन संभव नहीं होता।