Correct option is A
योजना पद्धति, जिसे अंग्रेजी में Project Method कहते हैं, शिक्षण की एक महत्वपूर्ण विधि है। इस पद्धति का श्रेय
किलपैट्रिक को जाता है, जो ड्यूवी के शिष्य थे। किलपैट्रिक ने इसे 1918 में एक व्यवस्थित रूप प्रदान किया। इस पद्धति
का उद्देश्य छात्रों को सामाजिक वातावरण में पूर्ण संलग्नता के साथ सहृदय और उद्देश्यपूर्ण कार्य करना सिखाना है।
इस विधि का उल्लेख रूसो, फ्रोबेल और विलियम काबेट की कृतियों में भी मिलता है। हालांकि, इसका सबसे पहला प्रयोग
1900 ई. में कोलम्बिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिचर्ड्स द्वारा किया गया। किलपैट्रिक ने इस पद्धति को प्रयोजनवाद के
सिद्धांतों के आधार पर विकसित किया और इसे शिक्षण के सभी विषयों में उपयोगी बनाया।
किलपैट्रिक के अनुसार: “प्रोजेक्ट वह सहृदय उद्देश्यपूर्ण कार्य है जो पूर्ण संलग्नता से सामाजिक वातावरण में किया जाता है।”
Information Booster:
· प्रोजेक्ट का स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण कार्य होता है।
· इसका संबंध वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से होता है।
· इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और क्रियाशीलता होती है।
· यह शिक्षार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करता है।
· प्रोजेक्ट विधि का उद्देश्य छात्रों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास विकसित करना है।
Additional Knowledge
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ड्यूवी और किलपैट्रिक को
ड्यूवी ने प्रगतिशील शिक्षा के सिद्धांतों की नींव रखी और किलपैट्रिक ने उनके इन सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में लागू किया। किलपैट्रिक को 'प्रोजेक्ट विधि' का जन्मदाता माना जाता है।
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स्टीवेन्सन और रिचर्ड्स को
1900 ई. में कोलम्बिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रिचर्ड्स ने प्रोजेक्ट विधि का प्रारंभिक प्रयोग किया। स्टीवेन्सन ने इस पद्धति को कुछ हद तक विकसित किया, लेकिन इसे व्यवस्थित रूप देने का श्रेय किलपैट्रिक को है।
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कुमारी हेलन पार्कहर्स्ट को
हेलन पार्कहर्स्ट ने डेल्टन प्लान विकसित किया, जो छात्रों की स्वतंत्रता और अनुशासन पर केंद्रित था। हालांकि,यह प्रोजेक्ट विधि से भिन्न है।
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कार्लटन वाशबर्न को
कार्लटन वाशबर्न ने 'विनीटका योजना' विकसित की थी। यह छात्रों के व्यक्तिगत विकास और कौशल आधारित शिक्षण पर केंद्रित थी।