Correct option is D
बी.एस. ब्लूम ने शिक्षा को त्रिपदी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया, जिसमें तीन मुख्य चरण शामिल हैं:
1.
शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण: इसमें यह तय किया जाता है कि छात्रों में कौन-से व्यवहार परिवर्तन लाने हैं।
2.
उद्देश्यों के लिए उपयुक्त अधिगम-अनुभव प्रदान करना: इस चरण में छात्रों को उपयुक्त शिक्षण विधियाँ और अनुभव प्रदान किए जाते हैं।
3.
व्यवहार परिवर्तन या अधिगम का मूल्यांकन: यह प्रक्रिया का अंतिम चरण है, जिसमें यह मूल्यांकन किया जाता है कि छात्रों के व्यवहार में किस हद तक परिवर्तन हुआ है।
ब्लूम का यह उपागम शिक्षण को केवल प्रस्तुतीकरण या सामान्यीकरण तक सीमित नहीं मानता, बल्कि इसे छात्रों के व्यवहार परिवर्तन तक ले जाने पर केंद्रित करता है।
व्यवहार परिवर्तन का महत्व:
·
मूल्यांकन की भूमिका: अधिगम अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों में किए गए व्यवहार परिवर्तन का मूल्यांकन किया जाता है।
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मापन की प्रक्रिया: इस मूल्यांकन के लिए निबंधात्मक परीक्षाएँ, मौखिक निरीक्षण, और साक्षात्कार का उपयोग किया जाता है।
·
शैक्षिक उद्देश्यों से सामंजस्य: मूल्यांकन प्रक्रिया का उद्देश्य शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त करना और यह सुनिश्चित करना है कि छात्र ने उन अनुभवों से लाभ प्राप्त किया हो।
Information Booster:
· ब्लूम ने शैक्षिक उद्देश्यों को तीन ज्ञान क्षेत्रों में वर्गीकृत किया:
1. संज्ञानात्मक
2. भावात्मक
3. मनो-गामक
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संज्ञानात्मक क्षेत्र: इसमें स्मरण, समझ, और विश्लेषण जैसी मानसिक प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
·
भावात्मक क्षेत्र: इसमें दृष्टिकोण, भावनाएँ, और मूल्यों का विकास होता है।
·
मनो-गामक क्षेत्र: यह कौशल और शारीरिक गतिविधियों पर आधारित है।
· ब्लूम का त्रिपदी उपागम शिक्षण को परिणाम-उन्मुख और छात्र-केंद्रित बनाता है।
Additional Knowledge:
1.
शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण:
· यह प्रक्रिया स्पष्ट करती है कि शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार में कौन-से परिवर्तन लाने हैं।
· उदाहरण: छात्रों को रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
2.
उपयुक्त अधिगम अनुभव:
· छात्रों को प्रायोगिक गतिविधियाँ, समूह कार्य, और परियोजनाओं के माध्यम से अनुभव प्रदान करना।
· उदाहरण: विज्ञान प्रयोगशाला में गतिविधियाँ।
3.
व्यवहार परिवर्तन:
· छात्रों के मूल्यांकन के लिए विभिन्न तकनीकों जैसे लिखित परीक्षाएँ और परियोजनाओं का उपयोग किया जाता है।
· उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि छात्रों ने सीखा हुआ ज्ञान व्यावहारिक रूप से लागू किया है।