Correct option is B
अरस्तु का 'काव्यशास्त्र' (poetics) पाश्चात्य साहित्य आलोचना की एक महत्वपूर्ण कृति है जिसमें कुल 26 अध्याय हैं ।
प्लेटो के विपरीत, जिन्होंने काव्य को निम्न श्रेणी का माना, अरस्तु ने उसे प्रशंसनीय बताया। उनके दो प्रमुख सिद्धांत हैं: अनुकरण और विरेचन ।
अनुकरण का अर्थ 'पुनः सृजन' है, जहाँ कला वास्तविकता का केवल नकल नहीं, बल्कि उसका आदर्श रूप प्रस्तुत करती है । विरेचन का अर्थ 'भावों का शुद्धिकरण' है, जहाँ त्रासदी दर्शकों के मन में करुणा और त्रास जगाकर उन्हें मानसिक शांति प्रदान करती है । त्रासदी के छह अंग हैं: कथानक, चरित्र, विचार, पदावली, गीत और दृश्य-विधान । अरस्तु ने त्रासदी को महाकाव्य से बेहतर बताया । इन सिद्धांतों ने पाश्चात्य साहित्य पर गहरा प्रभाव डाला है ।