Correct option is C
यह विचार मुख्य रूप से नॉम चॉम्स्की का है, जिन्होंने भाषा विकास के संबंध में "इननेट लैंग्वेज एक्विजिशन डिवाइस" (LAD) की अवधारणा प्रस्तुत की थी। चॉम्स्की का मानना था कि बच्चे जन्म से ही एक जैविक क्षमता के साथ आते हैं, जो उन्हें भाषा सीखने में सक्षम बनाती है। इस सिद्धांत के अनुसार, बच्चों के पास एक अंतर्निहित भाषा संरचना होती है, जो उन्हें व्याकरण और शब्दावली को समझने और उनका उपयोग करने में मदद करती है। इसका मतलब है कि भाषा सीखना एक स्वाभाविक और आंतरिक क्षमता है, न कि केवल वातावरण से प्रभावित होने वाली प्रक्रिया।
Information Booster:
नॉम चॉम्स्की के अनुसार, भाषा सीखने की क्षमता जन्मजात होती है और इसे किसी विशेष सिखावन की आवश्यकता नहीं होती।
उनका सिद्धांत "यूनिवर्सल ग्रामर" पर आधारित है, जो सभी मानव भाषाओं के लिए सामान्य होता है।
उन्होंने इस विचार को प्रतिपादित किया कि बच्चों के मस्तिष्क में एक विशेष तंत्र होता है जो उन्हें भाषा को तेजी से और सहज रूप से सीखने में मदद करता है।
चॉम्स्की के अनुसार, भाषा सीखना एक जैविक प्रक्रिया है जो समय के साथ स्वाभाविक रूप से होती है।
इस विचार का समर्थन भाषा सीखने के अनगिनत उदाहरणों से किया जाता है, जिसमें देखा गया है कि बच्चे कुछ निश्चित आयु के बाद स्वतः भाषा का ज्ञान प्राप्त करने लगते हैं।
Additional Knowledge:
एल.एस. वाइगोत्सकी: वाइगोत्सकी ने भाषा विकास में सामाजिक संदर्भ और बातचीत की भूमिका पर जोर दिया। उनके अनुसार, भाषा विकास बच्चों की सामाजिक परस्पर क्रिया का परिणाम है।
ईवाम पॉवलॉव: पॉवलॉव का कार्य शास्त्रीय अनुबंधन पर केंद्रित था, जो व्यवहारवाद से संबंधित है, लेकिन उन्होंने भाषा विकास पर विशेष रूप से ध्यान नहीं दिया।
जीन पियाजे: पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया और उनका मानना था कि बच्चे भाषा का विकास उनके संज्ञानात्मक विकास के साथ करते हैं। उन्होंने इसे अनुभव और परिपक्वता से जोड़ा।
Key Points:
नॉम चॉम्स्की का "इननेट लैंग्वेज एक्विजिशन" सिद्धांत बच्चों में भाषा विकास के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक है।
"यूनिवर्सल ग्रामर" का विचार इस सिद्धांत का प्रमुख हिस्सा है।
चॉम्स्की का मानना था कि बच्चों में भाषा सीखने की स्वाभाविक क्षमता होती है, जो उन्हें एक विशेष वातावरण की आवश्यकता के बिना भी भाषा सीखने में सक्षम बनाती है।