Correct option is A
परिचय
अभिनवगुप्तपादाचार्य कश्मीर के एक महान दार्शनिक, रहस्यवादी और सौंदर्यशास्त्री थे, जिन्होंने शैवदर्शन और काव्यशास्त्र दोनों में महत्त्वपूर्ण ग्रंथ लिखे हैं।
व्याख्या
दिए गए दोनों कथन
सही हैं।
·
(a) I & II उभे अपि सत्ये (कथन I और II दोनों सत्य हैं)।
कथन I : ईश्वरप्रत्यभिज्ञाविमर्शिनी अभिनवगुप्तप्राचार्यस्य रचना अस्ति। · यह कथन
सही है।
·
ईश्वरप्रत्यभिज्ञाविमर्शिनी (लघु विमर्शिनी) और
ईश्वरप्रत्यभिज्ञाविवृतिविमर्शिनी (बृहद् विमर्शिनी)
अभिनवगुप्त की महत्त्वपूर्ण दार्शनिक रचनाएँ हैं।
· ये ग्रंथ
प्रत्यभिज्ञा दर्शन (कश्मीर शैवदर्शन की एक प्रमुख शाखा) के संस्थापक
उत्पलाचार्य के
'ईश्वरप्रत्यभिज्ञा' सूत्रों पर
टीकाएँ हैं।
· इस टीका के माध्यम से अभिनवगुप्त ने
शिव ही जगत् का कर्ता है और
जीवात्मा भी शिव ही है (अर्थात् आत्म-पहचान ही मोक्ष है) इस सिद्धांत का विस्तृत विवेचन किया है।
कथन II : ध्वन्यालोकलोचनस्य रचयिता अभिनवगुप्तपादाचार्यः अस्ति। · यह कथन
सही है।
·
ध्वन्यालोकलोचन (संक्षेप में
लोचन)
अभिनवगुप्त की प्रसिद्ध
साहित्यशास्त्रीय कृति है।
· यह आचार्य
आनन्दवर्धन के प्रसिद्ध ग्रंथ
'ध्वन्यालोक' पर लिखी गई
टीका है।
· इस टीका में अभिनवगुप्त ने
ध्वनि सिद्धान्त (काव्य की आत्मा ध्वनि है) का अत्यंत गहन विवेचन किया है और
रस की अवधारणा को भी परिष्कृत किया है, जो परवर्ती काव्यशास्त्रियों के लिए आधार स्तंभ बनी।
रोचक तथ्य
· (b), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
· अभिनवगुप्त को उनके असाधारण ज्ञान और पांडित्य के कारण
'अभिनवगुप्तपादाचार्य' जैसे आदरणीय नामों से पुकारा जाता है।
· अभिनवगुप्त ने
नाट्यशास्त्र पर भी
'अभिनवभारती' नामक टीका लिखी, जो
भरतमुनि के
रस सिद्धान्त की व्याख्या के लिए सबसे प्रामाणिक स्रोत मानी जाती है।