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इनमें कौन सा संधि-शब्द गलत है ?
Question

इनमें कौन सा संधि-शब्द गलत है ?

A.

मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा

B.

देवी + अर्पण= देव्यर्पण

C.

वाक् + ईश = वागीश

D.

वर्षा + ऋतु = वर्षार्तु

Correct option is D

सही उत्तर: (D) वर्षा + ऋतु = वर्षार्तु
उत्तर की व्याख्या:
(D) वर्षा + ऋतु = वर्षार्तु
संधि प्रकार: गुण संधि
संधि-विच्छेद: 'वर्षा' + 'ऋतु' से 'वर्षार्तु' नहीं 'वर्षर्तु' बनता है। यहाँ 'वर्षा' और 'ऋतु' के बीच गुण संधि है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प
संधि प्रकार
संधि-विच्छेद
कारण
(A) मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
यण संधि
मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है।
(B) देवी + अर्पण = देव्यर्पण
यण संधि
देवी + अर्पण = देव्यर्पण
इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है।
(C) वाक् + ईश = वागीश
व्यंजन संधि
वाक् + ईश = वागीश
क, च, ट, त, प का मिलन वर्ग के तृतीय या चतुर्थ वर्ण से (ग, ज, ड, द, ब) या स्वर के साथ
(D) वर्षा + ऋतु = वर्षार्तु
गुण संधि
वर्षा + ऋतु = वर्षार्तु
गुण संधि के अनुसार इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है। लेकिन यह संधि विच्छेद गलत है। इसलिए यह विकल्प गलत है।
निष्कर्ष: यह गलत है, क्योंकि 'वर्षा' + 'ऋतु' से 'वर्षार्तु' बनना संधि के नियमों के अनुसार सही नहीं है।​
अतिरिक्त जानकारी:
सन्धि के तीन भेद होते हैं-
(1) स्वर-सन्धि
(2) व्यंजन सन्धि
(3) विसर्ग सन्धि
(1) स्वर संधि के प्रकार और उनके नियम व उदाहरण:
(2) व्यंजन संधि के नियमों को सारणी में व्यवस्थित किया है:
संधि का प्रकार
नियम
उदाहरण
विच्छेद
1. दीर्घ संधि
दो सजातीय स्वरों के मिलने से दीर्घ स्वर बनता है।
पुस्तकालय
पुस्तक + आलय
विद्यार्थी
विद्या + अर्थी
महात्मा
महा + आत्मा
2. गुण संधि
‘अ’ या ‘आ’ के साथ इ/ई हो तो ‘ए’, उ/ऊ हो तो ‘ओ’, और ऋ हो तो ‘अर’ बनता है।
नरेंद्र
नर + इंद्र
ज्ञानोपदेश
ज्ञान + उपदेश
महर्षि
महा + ऋषि
3.वृद्धि संधि
‘अ’/‘आ’ के साथ ए/ऐ हो तो ‘ऐ’ और ओ/औ हो तो ‘औ’ बनता है।
सदैव
सदा + एव
वनौषधि
वन + औषधि
महौदार्य
महा + औदार्य
4. यण संधि
इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है।
इत्यादि
इति + आदि
स्वागत
सु + आगत
अध्ययन
अधि + अयन
5.अयादि संधि
ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव, और औ का आव बनता है।
नयन
ने + अन
नाविक
नौ + इक
पवित्र
पो + इत्र
व्यंजन संधि के नियम
स्पष्टीकरण
उदाहरण
1. क, च, ट, त, प का मिलन वर्ग के तृतीय या चतुर्थ वर्ण से (ग, ज, ड, द, ब) या स्वर के साथ
क → ग, च → ज, ट → ड, त → द, प → ब में बदल जाता है।
दिक् + अंबर = दिगंबर, वाक् + ईश = वागीश, षट् + यंत्र = षड्यंत्र
2. क, म, ट, त, प का मिलन न या म से हो
क → ङ, ट → ण, त → न, प → म में बदल जाता है।
वाक् + मय = वाङ्मय, दिक् + मंडल = दिङ्मण्डल, षट् + मास = षण्मास
3. त का मिलन ग, घ, द, ध, प, म, य, र, स्वर से
त → द हो जाता है।
तत+ उपरांत- तदुपरांत, उत+ घाटन- उद्घाटन, जगत+ अंबा- जगदंबा
4. व्यंजन वर्ण के मिलन पर अनुस्वार
म् + य, र, ल, व, श, ष, स, ह के मिलन पर अनुस्वार लगता है।
सम् + रचना = संरचना, सम् + लग्न = संलग्न
5. त का मिलन च्, छ्, ज्, झ्, ट्, ड् से
त → च्, छ्, ज्, झ्, ट्, ड् में बदल जाता है।
उत् + चारण = उच्चारण, शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र
6. त या द के साथ ह् का मिलन
त → द, ह् → ध् में बदल जाता है।
सत् + जन = सज्जन, जगत् + जीवन = जगज्जीवन
7. स्वर के बाद छ् आने पर
छ् के पहले च् बन जाता है।
स्व + छंद = स्वच्छंद, आ + छादन = आच्छादन
8. म् के बाद क् से म् तक कोई व्यंजन
म् अनुस्वार में बदल जाता है।
सम् + कल्प = संकल्प, सम् + ख्या = संख्या, सम् + चय = संचय, किम् + चित = किंचित, किम् + कर = किंक
9. म् के बाद म का द्वित्व
म् + म का द्वित्व हो जाता है।
सम् + मति = सम्मति, सम् + मान = सम्मान
10. त या द के साथ श का मिलन
त या द → च्, श → छ।
उत् + श्वास = उच्छ्वास, उत् + शृंखल = उच्छृंखल
11. ऋ, र्, ष् से परे न् का ण्
न् → ण् हो जाता है जब बीच में कोई स्वर, क, ख, ग, घ, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व हो।
परि + नाम = परिणाम, राम + अयन = रामायण
12. स् के साथ स्वर का मिलन
स्वर के बाद ष में बदल जाता है।
अभि + सिक्त = अभिषिक्त, वि + सम = विषम
13. ऋ, र या ष के साथ न का मिलन
न के स्थान पर ण हो जाता है।
राम + अयन = रामायण, परि + नाम = परिणाम
(3) विसर्ग संधि और उसके नियम:
नियम संख्या
विवरण
उदाहरण
1
विसर्ग के बाद च या छ के मिलने पर विसर्ग "श्" बन जाता है।
मनः + चकित = मनश्चकित
2
विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर अन्य स्वर हो और बाद में कोई स्वर, य्, र, ल, व, ह आदि हो तो विसर्ग "र्" बन जाता है।
यशः + कृति = यश:कृति
3
विसर्ग से पहले स्वर और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग "श" बन जाता है।
चतुः + शिखा = चतु:शिखा
4
विसर्ग के बाद त या स होने पर विसर्ग "स्" बन जाता है।
अन्तः + स्थल = अन्तस्तल
5
विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ होने पर विसर्ग "ष" बन जाता है।
धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
6
विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है।
अतः + आदि = अतआदि
7
विसर्ग के बाद क, ख, प, फ होने पर कोई परिवर्तन नहीं होता।
नि: + कृत = निष्कृत
8
विसर्ग के पहले इ, उ हो और बाद में "र" हो तो विसर्ग का लोप होकर इ, उ "ई" व "ऊ" बन जाते हैं।
नि: + रव = नीरव
9
विसर्ग के पहले अ हो और बाद में भिन्न स्वर होने पर विसर्ग का लोप हो जाता है।
पयः + आदि = पयआदि
10
विसर्ग के पहले अ हो और बाद में अ, ग, घ, ज, ड, ढ, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह आदि हो तो विसर्ग "ओ" बन जाता है।
सरः + ज = सरोज

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