Correct option is C
अभि + इष्ट = अभीष्ट
संधि के समय ‘अभि’ + ‘इष्ट’ के मेल से दीर्घ स्वर संधि होती है, और यह ‘अभीष्ट’ बनता है।
विकल्प | संधि-विग्रह | विश्लेषण |
|---|---|---|
A | अभी + इष्ट | "अभी" समयसूचक शब्द है, जिसका यहाँ कोई संबंध नहीं है। |
B | अभि + ईष्ट | "ईष्ट" में ई दीर्घ है, जबकि मूल शब्द 'इष्ट' है। |
C | अभि + इष्ट | सही संधि-विग्रह, 'अभीष्ट' में 'भि' और 'इ' के मेल से संधि बनती है। |
D | अभी + ईष्ट | "अभी" + "ईष्ट" — दोनों ही गलत आधार पर हैं। |
संधि का प्रकार | नियम | उदाहरण | विच्छेद |
1. दीर्घ संधि | दो सजातीय स्वरों के मिलने से दीर्घ स्वर बनता है। | पुस्तकालय | पुस्तक + आलय |
विद्यार्थी | विद्या + अर्थी | ||
महात्मा | महा + आत्मा | ||
2. गुण संधि | ‘अ’ या ‘आ’ के साथ इ/ई हो तो ‘ए’, उ/ऊ हो तो ‘ओ’, और ऋ हो तो ‘अर’ बनता है। | नरेंद्र | नर + इंद्र |
ज्ञानोपदेश | ज्ञान + उपदेश | ||
महर्षि | महा + ऋषि | ||
3.वृद्धि संधि | ‘अ’/‘आ’ के साथ ए/ऐ हो तो ‘ऐ’ और ओ/औ हो तो ‘औ’ बनता है। | सदैव | सदा + एव |
वनौषधि | वन + औषधि | ||
महौदार्य | महा + औदार्य | ||
4. यण संधि | इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’, और ऋ का ‘र’ बनता है। | इत्यादि | इति + आदि |
स्वागत | सु + आगत | ||
अध्ययन | अधि + अयन | ||
5.अयादि संधि | ए का अय, ऐ का आय, ओ का अव, और औ का आव बनता है। | नयन | ने + अन |
नाविक | नौ + इक | ||
पवित्र | पो + इत्र |