Correct option is B
सही उत्तर: (b) द्वंद्व समास
व्याख्या:
'पाप-पुण्य' में द्वंद्व समास है।
· द्वंद्व समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और इनमें 'और' या 'एवं' का भाव निहित होता है।
· 'पाप-पुण्य' का अर्थ है "पाप और पुण्य"।
· इस समास में दोनों शब्द (पाप और पुण्य) स्वतंत्र रूप से अपने अर्थ को बनाए रखते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | शब्द | सही या गलत | स्पष्टीकरण |
A | कर्मधारय | गलत | कर्मधारय समास में एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है। उदाहरण: नीलकमल (नीला है कमल)। |
B | द्वंद्व | सही | 'पाप-पुण्य' में 'पाप और पुण्य' का संबंध है, जो द्वंद्व समास को दर्शाता है। |
C | तत्पुरुष | गलत | तत्पुरुष समास में 'का', 'के', या 'की' का संबंध होता है। उदाहरण: ग्रामराज (ग्राम का राजा)। |
D | बहुव्रीहि | गलत | बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी अन्य का बोध कराते हैं। उदाहरण: चक्रपाणि (जिसके हाथ में चक्र है)। |
सूचना बूस्टर:
● द्वंद्व समास:
· दोनों पद प्रधान होते हैं।
· इन पदों के बीच 'और' या 'एवं' का भाव रहता है।
· उदाहरण: माता-पिता (माता और पिता), सुख-दुख (सुख और दुख)।
● कर्मधारय समास:
· विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है।
· उदाहरण: नीलकमल (नीला है कमल)।
● तत्पुरुष समास:
· पूर्व और उत्तर पद में कर्ता-कर्म, संबंध, या अधिकार का बोध होता है।
· उदाहरण: जलपात्र (जल का पात्र)।
● बहुव्रीहि समास:
· दोनों पद मिलकर किसी अन्य का बोध कराते हैं।
· उदाहरण: दशानन (जिसके दस मुख हैं)।
'पाप-पुण्य' का संबंध 'और' भाव के कारण इसे द्वंद्व समास बनाता है।