Correct option is A
- 'निश्चल' का संधि-विच्छेद 'निः' + 'चल' है।
- यह विसर्ग संधि का उदाहरण है।
- नियम;- यदि विसर्ग के बाद च, छ या श हो तो विसर्ग का श् हो जाता है।
- यहाँ 'निः' (जिसका अर्थ होता है 'बिना' या 'निराकार') और 'चल' (जो 'चल' का अर्थ 'चलने वाला' होता है) का मिलकर 'निश्चल' शब्द बनता है।
- 'निश्चल' का अर्थ होता है 'निरंतर स्थिर' या 'जो नहीं चलता' (अचल)।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | विश्लेषण | निष्कर्ष |
निः + चल | यह सही है क्योंकि 'निः' और 'चल' मिलकर 'निश्चल' बनाते हैं। | सही |
निश् + चल | यह गलत है क्योंकि 'निश्' का कोई व्याकरणिक रूप नहीं है। | गलत |
निस् + चल | यह गलत है, 'निस्' का प्रयोग संधि में नहीं होता। | गलत |
निः + अचल | यह गलत है, क्योंकि 'अचल' अलग शब्द है, और 'निः + अचल' का कोई संधि रूप नहीं बनता। | गलत |
अतिरिक्त जानकारी
संधि- दो शब्दों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है उसे संधि कहते हैं।
- संधि के तीन प्रकार है -1. स्वर, 2. व्यंजन और 3. विसर्ग,
- संधि के प्रकार तथा परिभाषा :
संधि का प्रकार | परिभाषा | उदाहरण | संधि विच्छेद |
1. स्वर संधि | जब स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | विद्यार्थी | विद्या + अर्थी |
महेश | महा + ईश | ||
2. व्यंजन संधि | जब एक व्यंजन से दूसरे व्यंजन या स्वर के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | अहंकार | अहम् + कार |
उल्लास | उत् + लास | ||
3. विसर्ग संधि | जब विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | दुरात्मा | दुः + आत्मा |
निष्कप | निः + कपट |
विसर्ग संधि: जब विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन आ जाए तब जो परिवर्तन होता है ,वह विसर्ग संधि कहलाता है।
उदाहरण:
- मन: + अनुकूल = मनोनुकूल
- नि: + पाप =निष्पाप
विसर्ग संधि के नियम
विसर्ग संधि के 10 नियम होते हैं, जिनके बारे में नीचे दिया गया है:
विसर्ग संधि और उसके नियम की तालिका :
नियम संख्या | विवरण | उदाहरण |
1 | विसर्ग के बाद च या छ के मिलने पर विसर्ग "श्" बन जाता है। | मनः + चकित = मनश्चकित |
2 | विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर अन्य स्वर हो और बाद में कोई स्वर, य्, र, ल, व, ह आदि हो तो विसर्ग "र्" बन जाता है। | यशः + कृति = यश:कृति |
3 | विसर्ग से पहले स्वर और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग "श" बन जाता है। | चतुः + शिखा = चतु:शिखा |
4 | विसर्ग के बाद त या स होने पर विसर्ग "स्" बन जाता है। | अन्तः + स्थल = अन्तस्तल |
5 | विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ होने पर विसर्ग "ष" बन जाता है। | धनुः + टंकार = धनुष्टंकार |
6 | विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। | अतः + आदि = अतआदि |
7 | विसर्ग के बाद क, ख, प, फ होने पर कोई परिवर्तन नहीं होता। | नि: + कृत = निष्कृत |
8 | विसर्ग के पहले इ, उ हो और बाद में "र" हो तो विसर्ग का लोप होकर इ, उ "ई" व "ऊ" बन जाते हैं। | नि: + रव = नीरव |
9 | विसर्ग के पहले अ हो और बाद में भिन्न स्वर होने पर विसर्ग का लोप हो जाता है। | पयः + आदि = पयआदि |
10 | विसर्ग के पहले अ हो और बाद में अ, ग, घ, ज, ड, ढ, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह आदि हो तो विसर्ग "ओ" बन जाता है। | सरः + ज = सरोज |
निष्कर्ष:
- 'निश्चल' का सही संधि-विच्छेद है 'निः + चल'।
- इसलिए सही उत्तर: (A) निः + चल