Correct option is A
सही उत्तर: (A) निष्ठुर = नि + स्थुर
उत्तर की व्याख्या:
· 'निष्ठुर' शब्द का संधि-विच्छेद सही रूप से 'नि' + 'स्थुर' है।
· 'निष्ठुर' में
व्यंजन संधि का पालन हुआ है, क्योंकि पहले पद का अंत व्यंजन ('न') और दूसरे पद का आरंभ व्यंजन ('स्') से हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप दोनों पद एक साथ मिलकर 'निष्ठुर' शब्द का निर्माण करते हैं।
·
संधि नियम: जब पहला पद 'नि' और दूसरा पद 'स्थुर' मिलता है, तो संधि के तहत दोनों मिलकर 'निष्ठुर' बनता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प |
संधि प्रकार |
सही संधि-विच्छेद |
विवरण |
निष्कर्ष |
| (A) निष्ठुर = नि + स्थुर |
व्यंजन संधि |
'निष्ठुर' का संधि-विच्छेद 'नि' + 'स्थुर' है। |
पहले पद का अंत 'न' और दूसरे पद का प्रारंभ 'स्थ' (व्यंजन) से होने के कारण व्यंजन संधि हुई। |
यह सही है। |
| (B) पर्यटन = परी + अटन |
यणं संधि |
सही संधि 'परि' + 'अटन' होनी चाहिए। |
'पर्यटन' में यण संधि होनी चाहिए, लेकिन 'परी' और 'अटन' का कोई सही संधि संबंध नहीं बनता। |
यह गलत है। सही संधि 'परि' + 'अटन' होनी चाहिए। |
| (C) वार्तालाप = वार्त + अलाप |
दीर्घ संधि |
सही संधि-विच्छेद 'वार्ता' + 'आलाप' है। |
'आ' और 'आ' के मिलन से दीर्घ संधि बनती है। |
यह सही है, लेकिन संधि-विच्छेद गलत था ('वार्त' और 'अलाप' का मिलन नहीं होता, 'वार्ता' और 'आलाप' का मिलन होता है)। |
| (D) भानूदय = भानू + उदय |
दीर्घ संधि |
संधि-विच्छेद 'भानु ' + 'उदय' है। |
'आ' और 'उ' के मिलन से दीर्घ संधि बनती है। |
भानूदय = भानू + उदय नहीं होगा। यह गलत है। |
व्यंजन संधि के नियमों की सारणी:
| नियम संख्या |
नियम का विवरण |
उदाहरण |
| 1. वर्ग के पहले वर्ण (क, च, ट, त, प) का परिवर्तन |
जब किसी वर्ग के पहले वर्ण का मिलन तीसरे, चौथे, य, र, ल, व, ह या किसी स्वर से हो तो वह बदल जाता है। |
क → ग : दिक् + अंबर = दिगंबर ट → ड : षट् + आनन = षडानन त → द : तत् + उपरांत = तदुपरांत प → ब : अप् + ज = अब्ज |
| 2. वर्ग के पहले वर्ण का न/म के साथ मिलन |
यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण का मिलन न या म वर्ण के साथ हो तो वह बदल जाता है। |
क → ङ : वाक् + मय = वाङ्मय ट → ण : षट् + मास = षण्मास त → न : उत् + नति = उन्नति प → म : अप् + मय = अम्मय |
| 3. त् का मिलन ग, घ, द, ध, प, म, य, र, स्वर से हो तो द् बन जाता है |
म के साथ किसी भी वर्ण के मिलन पर म की जगह वह वर्ण बन जाता है। |
म् + क → ङ् : सम् + कल्प = संकल्प म् + च → ञ् : सम् + चय = संचय त् + ब → द् : सत् + भावना = सद्भावना त् + ईश → द् : जगत् + ईश = जगदीश |
| 4. विशेष वर्णों का परिवर्तन |
यदि त् का मिलन च, ज, झ, ट, ड, ल से हो तो वह इन वर्णों में बदल जाता है। |
त् + च → च् : उत् + चारण = उच्चारण त् + ज → ज् : सत् + जन = सज्जन म् + य → अनुस्वार : सम् + रचना = संरचना |
| 5. त् का मिलन श् से हो तो त् → च् और श् → छ् हो जाता है |
जब त् या द् का मिलन च, छ से हो तो त् या द् → च् हो जाता है। |
त् + श् : उत् + श्वास = उच्छ्वास त् + शिष्ट : उच्छिष्ट |
| 6. त् + ह = द् + ध |
यदि त् का मिलन ह् से हो तो त् → द् और ह् → ध् हो जाता है। |
त् + ह : उत् + हार = उद्धार उत् + हरण = उद्धरण |
| 7. स्वर + छ = छ के पहले च आ जाता है |
त्/द् + ट, ठ = ट् त्/द् + ड, ढ = ड् |
अ + छ → च् : स्व + छंद = स्वच्छंद तत् + टीका = तट्टीका |
| 8. अनुस्वार बनने का नियम |
यदि म् के बाद क् से म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार बन जाता है। त्/द् + ल = ल् |
म् + च : किम् + चित = किंचित त् + ल : उत् + लास = उल्लास |
| 9. म् के बाद म् आने पर द्वित्व हो जाता है |
त्/द् + ह = द् + ध |
म् + म् : सम् + मति = सम्मति त् + ह : उत् + हृत = उद्धृत |
| 10. अनुस्वार नियम |
म् + य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से कोई वर्ण आए तो म् → अनुस्वार |
म् + र : सम् + रक्षण = संरक्षण म् + व : सम् + योग = संयोग |
| 11. ऋ, र, ष से परे न् → ण् |
चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, श, स का व्यवधान होने पर न् → ण् नहीं होता। स्वर + छ → स्वर + च् + छ |
र् + न : परि + नाम = परिणाम स्वर + छ : आ + छादन = आच्छादन |
| 12. स् का परिवर्तन |
यदि स् से पहले अ, आ के अलावा कोई स्वर हो तो स् → ष |
स् + अ : वि + सम = विषम भ् + स् : अभि + सिक्त = अभिषिक्त |