Correct option is A
परिचय
महाकवि भवभूति संस्कृत नाट्य साहित्य में करुण रस के प्रयोग के लिए विख्यात हैं। वह
उत्तररामचरितम्, महावीरचरितम् और
मालतीमाधवम् नामक तीन नाटकों के रचयिता हैं।
व्याख्या
दिए गए दोनों कथन
सही हैं।
·
(a) I & II उभे अपि सत्ये (कथन I और II दोनों सत्य हैं)।
कथन I : भवभूतेः रचना उत्तररामचरितम् अस्ति। · यह कथन
सत्य है।
·
उत्तररामचरितम् भवभूति की
सर्वोत्कृष्ट रचना है।
· यह नाटक सात अंकों में है और इसमें
श्रीराम के
उत्तर जीवन (राज्याभिषेक के बाद) की कथा,
सीता के परित्याग, वनवास और अंत में उनके
पुनर्मिलन का मार्मिक चित्रण है।
· इस नाटक में
करुण रस की प्रधानता है, जिसके बारे में भवभूति ने कहा है:
"एको रसः करुण एव"।
कथन II : भवभूतेः रचना महावीरचरितम् अस्ति। · यह कथन
सत्य है।
·
महावीरचरितम् भी भवभूति द्वारा रचित सात अंकों का एक नाटक है।
· इस नाटक में
श्रीराम के
पूर्व जीवन (विवाह से लेकर राज्याभिषेक तक) की कथा का वर्णन है, जिसमें
वीर रस की प्रधानता है।
· यह नाटक रामकथा के
उत्तरार्ध (उत्तररामचरितम्) का
पूर्वांग है।
रोचक तथ्य
· (b), (c), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
· भवभूति की तीसरी प्रसिद्ध रचना एक
प्रकरण है, जिसका नाम
मालतीमाधवम् है। यह सामाजिक और प्रेम कथा पर आधारित है।
· भवभूति को
'पदन्यास निपुण' और
'शिखरिणी कवि' भी कहा जाता है।