hamburger menu
All Coursesall course arrow
adda247
reward-icon
adda247
    arrow
    arrow
    arrow
    अधोलिखितं कथनद्वयमाश्रित्य समुचितमुत्तरं चिनुत - कथनम् I : रीतिः काव्यस्य आत्मा अस्ति। कथनम् II : अलङ्कारमतस्य प्रधानप्रवर्तकः आचार्य कुन्तकः अस
    Question

    अधोलिखितं कथनद्वयमाश्रित्य समुचितमुत्तरं चिनुत -
    कथनम् I : रीतिः काव्यस्य आत्मा अस्ति।
    कथनम् II : अलङ्कारमतस्य प्रधानप्रवर्तकः आचार्य कुन्तकः अस्ति।
    समुचितं विकल्पं चिनुत -

    A.

    I & II उभे अपि सत्ये

    B.

    I & II उभे अपि असत्ये

    C.

    I सत्यम् परन्तु II असत्यम्

    D.

    I असत्यम् परन्तु II सत्यम्

    Correct option is C


    परिचय
    काव्यशास्त्र में विभिन्न आचार्यों ने काव्य के स्वरूप और उसकी आत्मा (सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तत्त्व) को लेकर छः प्रमुख सम्प्रदायों ( रस, अलंकार, रीति, ध्वनि, वक्रोक्ति, औचित्य) का प्रतिपादन किया है।
    व्याख्या
    दिए गए कथनों में, कथन I सही है और कथन II गलत है।
    · (c) I सत्यम् परन्तु II असत्यम् (कथन I सत्य है परन्तु कथन II असत्य है)।
    कथन I : रीतिः काव्यस्य आत्मा अस्ति। · यह कथन सही है।
    · रीति सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य वामन ने अपने ग्रन्थ 'काव्यालङ्कारसूत्रवृत्ति' में स्पष्ट रूप से रीति को काव्य की आत्मा घोषित किया है।
    · उनकी प्रसिद्ध उक्ति है: "रीतिरात्मा काव्यस्य"
    · वामन के अनुसार, रीति विशिष्ट पद-रचना है, जो 'गुण' (माधुर्य, ओज, प्रसाद) पर आधारित होती है।
    कथन II : अलङ्कारमतस्य प्रधानप्रवर्तकः आचार्य कुन्तकः अस्ति। · यह कथन गलत है।
    · अलंकार सम्प्रदाय के प्रधान प्रवर्तक आचार्य भामह (ग्रन्थ: काव्यालंकार) और दण्डी (ग्रन्थ: काव्यादर्श) माने जाते हैं।
    · इन आचार्यों ने अलंकार को काव्य का सर्वस्व मानकर काव्य के स्वरूप का विवेचन किया।
    · आचार्य कुन्तक वक्रोक्ति सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं, न कि अलंकार सम्प्रदाय के। उनका ग्रंथ 'वक्रोक्तिजीवितम्' है, जिसमें उन्होंने वक्रोक्ति को काव्य का जीवित (आत्मा) माना है।
    रोचक तथ्य
    · (a), (b), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
    · रीति को मार्ग या शैली भी कहा जाता है। आचार्य वामन ने मुख्य रूप से तीन रीतियाँ मानी हैं: वैदर्भी, गौडी, पाञ्चाली
    · यद्यपि कुन्तक ने वक्रोक्ति को काव्य की आत्मा माना, तथापि उनकी वक्रोक्ति भी अंततः शब्द और अर्थ का वैचित्र्य है, जो अलंकार के अन्तर्गत ही आता है, परन्तु वह अलंकार सम्प्रदाय के प्रधान प्रवर्तक नहीं हैं।

    Free Tests

    Free
    Must Attempt

    Odd One Out

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon10 Questions
    • pdpsheetsIcon10 Marks
    • timerIcon10 Mins
    languageIcon English
    Free
    Must Attempt

    Number System

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon10 Questions
    • pdpsheetsIcon10 Marks
    • timerIcon10 Mins
    languageIcon English
    Free
    Must Attempt

    General Studies Subject Test 01

    languageIcon English
    • pdpQsnIcon20 Questions
    • pdpsheetsIcon20 Marks
    • timerIcon15 Mins
    languageIcon English

    Similar Questions

    test-prime-package

    Access ‘Haryana Assistant Professor’ Mock Tests with

    • 60000+ Mocks and Previous Year Papers
    • Unlimited Re-Attempts
    • Personalised Report Card
    • 500% Refund on Final Selection
    • Largest Community
    students-icon
    368k+ students have already unlocked exclusive benefits with Test Prime!
    Our Plans
    Monthsup-arrow