Correct option is D
सही उत्तर: (D) धर्म ही हैं प्राण जिनके वह
व्याख्या:
"धर्म-प्राण" शब्द में कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है "जिसके प्राण धर्म में निहित हों।"
यह एक गुणवाचक शब्द है, जो व्यक्ति के चरित्र और विचारधारा को दर्शाता है।
यह एक गुणवाचक शब्द है, जो व्यक्ति के चरित्र और विचारधारा को दर्शाता है।
विग्रह:
- धर्म-प्राण: धर्म और प्राण का समन्वय।
- इसका विग्रह होगा: "धर्म ही हैं प्राण जिनके वह।"
- यह उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जिसके लिए धर्म सबसे महत्वपूर्ण है, यानी जिसकी आत्मा और जीवन धर्म में स्थित है।
विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प | अर्थ | सही या गलत | स्पष्टीकरण |
|---|---|---|---|
| A) धर्मात्मा और प्राण | धर्म और आत्मा का संबंध। | गलत | यह "धर्म-प्राण" के अर्थ से मेल नहीं खाता। |
| B) धर्म और प्राण | केवल शब्दों का सरल विग्रह। | गलत | यह अर्थ को पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं करता। |
| C) ज्यो धर्म से भीरू हो वह | धर्म के प्रति भय दिखाता है। | गलत | यह "धर्म-प्राण" का सही अर्थ नहीं है। |
| D) धर्म ही हैं प्राण जिनके वह | धर्म को जीवन का आधार बताता है। | सही | यह "धर्म-प्राण" के अर्थ को सही रूप से व्यक्त करता है। |
महत्वपूर्ण बिंदु:
धर्म-प्राण का अर्थ:
- ऐसा व्यक्ति जिसके लिए धर्म सबसे महत्वपूर्ण है।
- यह व्यक्ति की विचारधारा और उसके जीवन के उद्देश्य को दर्शाता है।
कर्मधारय समास:
- ऐसा समास जिसमें विशेषण और संज्ञा का संबंध हो।
- यहाँ "धर्म" विशेषण और "प्राण" संज्ञा है।
निष्कर्ष:
"धर्म-प्राण" का विग्रह होगा: धर्म ही हैं प्राण जिनके वह।
सही उत्तर: (D) धर्म ही हैं प्राण जिनके वह।
"धर्म-प्राण" का विग्रह होगा: धर्म ही हैं प्राण जिनके वह।
सही उत्तर: (D) धर्म ही हैं प्राण जिनके वह।