Correct option is D
सही उत्तर: (d) द्वंद्व समास
व्याख्या:
'देवासुर' में द्वंद्व समास है।
· द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और वे एक साथ जुड़े हुए अपना अर्थ स्पष्ट करते हैं।
· देवासुर का अर्थ है "देवता और असुर"।
· यह समास दो भिन्न-भिन्न शब्दों (देव + असुर) को मिलाकर बनाया गया है, जिनमें 'और' का अर्थ निहित होता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | शब्द | सही या गलत | स्पष्टीकरण |
A | बहुव्रीहि | गलत | बहुव्रीहि समास में जो अर्थ निकलता है, वह दोनों पदों से भिन्न होता है। उदाहरण: चक्रपाणि (जिसके हाथ में चक्र है)। |
B | कर्मधारय | गलत | कर्मधारय समास में एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है। उदाहरण: नीलकमल (नीला है कमल)। |
C | तत्पुरुष | गलत | तत्पुरुष समास में दोनों पदों में कर्ता-कर्म का संबंध होता है। उदाहरण: ग्रामराज (ग्राम का राजा)। |
D | द्वंद्व | सही | द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, जैसे देव + असुर = देवासुर। |
सूचना बूस्टर:
● द्वंद्व समास: दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं।
● द्वंद्व समास: दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं।
● उदाहरण: माता-पिता, सुख-दुख, राम-लक्ष्मण।
● बहुव्रीहि समास: जिसमें दोनों पद मिलकर किसी अन्य का बोध कराते हैं।
● कर्मधारय समास: विशेषण-विशेष्य के संबंध में होता है।
● तत्पुरुष समास: कर्ता-कर्म, अधिकार आदि संबंधों को व्यक्त करता है।
● द्वंद्व समास में 'और' या 'एवं' का भाव निहित रहता है।