Correct option is B
Correct Option: (b) रामचंद्र शुक्ल ने घनानंद के लिए
INTRODUCTION
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने समीक्षात्मक लेखन में रीतिकाल के कवियों का गंभीर मूल्यांकन किया है। रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि घनानंद की भाषा-शैली, लाक्षणिकता और प्रेम की पीर पर शुक्ल जी ने अत्यंत मौलिक और सारगर्भित विचार व्यक्त किए हैं।
INFORMATION BOOSTER
यह प्रसिद्ध उद्धरण आचार्य रामचंद्र शुक्ल के 'हिंदी साहित्य का इतिहास' के 'रीतिकाल: रीतिमुक्त धारा' खंड से लिया गया है। शुक्ल जी ने यह बात घनानंद की भाषा की प्रांजलता, व्यंजकता और लाक्षणिक वैचित्र्य की प्रशंसा करते हुए कही है। घनानंद को 'साक्षात रस मूर्ति' और 'जवाबदानी का दावा रखने वाला कवि' भी शुक्ल जी ने ही कहा है।
ADDITIONAL KNOWLEDGE
घनानंद मुगल सम्राट मोहम्मद शाह रंगीले के मीर मुंशी थे और 'सुजान' नामक नर्तकी से प्रेम करते थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'सुजान सागर', 'विरह लीला', 'लोकसार' और 'रसकेली वल्ली' प्रमुख हैं।