Correct option is B
सही उत्तर: (b) ज्ञानाश्रयी
विस्तृत उत्तर:
कबीरदास 15वीं सदी के प्रमुख संत और कवि थे, जो भक्ति आंदोलन के निर्गुण शाखा के प्रतिनिधि माने जाते हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः ज्ञानाश्रयी शाखा से संबंधित हैं, जहाँ उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल दिया और सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वासों, तथा पाखंड का विरोध किया।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
(a) प्रेमाश्रयी: यह शाखा सगुण भक्ति पर केंद्रित होती है, जहाँ ईश्वर को प्रेम के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।
(c) रामाश्रयी: यह शाखा भगवान राम की भक्ति पर आधारित है।
(d) कृष्णाश्रयी: यह शाखा भगवान कृष्ण की भक्ति पर केंद्रित है।
कबीरदास जी की रचनाएँ और उपदेश ज्ञानाश्रयी शाखा के अंतर्गत आते हैं, जहाँ उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना और सामाजिक सुधार पर जोर दिया। इसलिए, सही उत्तर है (b) ज्ञानाश्रयी।