Correct option is B
सही उत्तर: B - आचार्य विश्वनाथ
व्याख्या:
'साहित्य दर्पण' संस्कृत साहित्य का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना आचार्य विश्वनाथ ने की थी।
यह ग्रंथ साहित्य शास्त्र और काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धांतों को समझाने वाला एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।
इसमें काव्य के स्वरूप, प्रकार, अलंकार, रस, और नाट्यशास्त्र के बारे में विस्तृत विवेचना की गई है।
साहित्य दर्पण का विशेष योगदान यह है कि इसने रस और अलंकार पर आधारित साहित्यिक सिद्धांतों को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया।
यह ग्रंथ साहित्य शास्त्र और काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धांतों को समझाने वाला एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।
इसमें काव्य के स्वरूप, प्रकार, अलंकार, रस, और नाट्यशास्त्र के बारे में विस्तृत विवेचना की गई है।
साहित्य दर्पण का विशेष योगदान यह है कि इसने रस और अलंकार पर आधारित साहित्यिक सिद्धांतों को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | रचनाकार | सही/गलत | कारण |
|---|---|---|---|
A - पंडित जगन्नाथ | संस्कृत साहित्य के प्रमुख आलोचक, 'रस गंगाधर' के रचयिता। | गलत | उन्होंने 'साहित्य दर्पण' की रचना नहीं की। |
B - आचार्य विश्वनाथ | 'साहित्य दर्पण' के रचयिता। | सही | 'साहित्य दर्पण' का रचना कार्य आचार्य विश्वनाथ द्वारा किया गया। |
C - तुलसीदास | 'रामचरितमानस' और अन्य अवधी साहित्य के प्रसिद्ध कवि। | गलत | उन्होंने 'साहित्य दर्पण' की रचना नहीं की। |
D - भरत मुनि | 'नाट्यशास्त्र' के रचयिता। | गलत | 'साहित्य दर्पण' से उनका संबंध नहीं है। |
निष्कर्ष:
'साहित्य दर्पण' के रचयिता आचार्य विश्वनाथ हैं। सही उत्तर (B) है।