Correct option is A
सही उत्तर: (A) - बहुब्रीहि
व्याख्या:
- बहुब्रीहि समासवह समास है जिसमें पूर्व पद और उत्तर पद दोनों गौण होते हैं और तीसरा पद (जो कि समास का समग्र अर्थ प्रदान करता है) प्रधान होता है।
- इस प्रकार के समास में दोनों पदों के मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न होता है, और किसी अन्य नये रूप में अर्थ की परिभाषा दी जाती है।
- बहुब्रीहि समास में हम दोनों शब्दों के संयोजन से एक नया शब्द बनाते हैं, जो पहले से अस्तित्व में न हो और किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु को दर्शाता हो।
उदाहरण:
· चतुर्वेदी (चार वेदों को जानने वाला):
- यहाँ चतु (चार) और वेदी (वेदों वाला) का समास हुआ है।
- चतुर्वेदी वह व्यक्ति होता है जो चार वेदों को जानता है, यानी वह वेदज्ञ व्यक्ति।
- यहाँ चतु (चार) और वेदी (वेदों वाला) गौण हैं, और अर्थ एक नया विशेषण उत्पन्न करता है: चतुर्वेदी।
2. सूर्यचंद्र (सूर्य और चंद्रमा):
- सूर्य और चंद्र दोनों का मिलकर एक नया अर्थ उत्पन्न होता है - सूर्य और चंद्रमा दोनों को एक साथ संदर्भित करने वाला शब्द।
समासों का विश्लेषण:
विकल्प | व्याख्या |
बहुब्रीहि | सही है। इस समास में पूर्व और उत्तर पद गौण होते हैं और तीसरा पद प्रधान होता है। |
कर्मधारय | गलत है। इसमें एक संबंध या विशेषता होती है और यह गुणात्मक होते हैं। |
तत्पुरुष | गलत है। यह समास पूर्व पद में प्रधानता दर्शाता है, न कि तीसरे पद में। |
द्वन्द्व | गलत है। इसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं, न कि कोई तीसरा पद। |
निष्कर्ष:
- बहुब्रीहि समास में पूर्व पद और उत्तर पद का अर्थ गौण हो जाता है और नया शब्द किसी विशेष तत्व को बताता है।
- इसलिए सही उत्तर: (A) - बहुब्रीहि