Correct option is A
सही उत्तर: (A) वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश
व्याख्या:
हिंदी भाषा का विकास वैदिक संस्कृत से शुरू होकर आधुनिक हिंदी तक कई चरणों में हुआ है। यह क्रम निम्नलिखित है:
वैदिक संस्कृत:
- यह सबसे प्राचीन भाषा है, जो वेदों, ब्राह्मण ग्रंथों, और उपनिषदों में पाई जाती है।
- इसका प्रयोग मुख्य रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक साहित्य में हुआ।
लौकिक संस्कृत:
- यह वैदिक संस्कृत का परिष्कृत रूप है।
- इसमें महाकाव्य (महाभारत, रामायण) और काव्य साहित्य की रचना हुई।
- यह अधिक व्यवस्थित और साहित्यिक भाषा है।
पालि:
- यह गौतम बुद्ध के समय की भाषा है, जिसका उपयोग बौद्ध साहित्य और त्रिपिटक में हुआ।
- यह प्राचीन भारतीय लोकभाषा का प्रतिनिधित्व करती है।
प्राकृत:
- यह पालि के बाद विकसित हुई।
- यह लोकभाषा का अधिक विकसित रूप है, जो संस्कृत से सरल है।
- जैन धर्म के ग्रंथ प्राकृत में लिखे गए।
अपभ्रंश:
- यह प्राकृत का परवर्ती रूप है।
- आधुनिक भारतीय भाषाओं, जैसे हिंदी, का उद्गम अपभ्रंश से हुआ।
- इस काल में काव्य और साहित्य का उदय हुआ।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प | सही/अशुद्ध | कारण |
|---|---|---|
| (A) | सही | वैदिक संस्कृत से अपभ्रंश तक का क्रम ऐतिहासिक रूप से सही है। |
| (B) | अशुद्ध | वैदिक संस्कृत के बाद लौकिक संस्कृत आती है; अपभ्रंश अंत में आता है। |
| (C) | अशुद्ध | अपभ्रंश प्राकृत के बाद आता है, पालि प्राकृत से पहले है। |
| (D) | अशुद्ध | अपभ्रंश, लौकिक संस्कृत से पहले नहीं होता। |
निष्कर्ष:
हिंदी भाषा का विकास वैदिक संस्कृत → लौकिक संस्कृत → पालि → प्राकृत → अपभ्रंश के क्रम में हुआ है।
इसलिए, सही उत्तर है: (A) वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश।
इसलिए, सही उत्तर है: (A) वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश।