Correct option is C
परिचय
संस्कृत काव्यशास्त्र में
रस, ध्वनि, अलंकार, रीति, वक्रोक्ति और
औचित्य नामक छः प्रमुख सम्प्रदाय हैं, जिनमें काव्य के स्वरूप और आत्मा का विवेचन किया गया है।
व्याख्या
दिए गए तीनों युग्म
सही हैं।
·
(c) सर्वाणि त्रीणि युग्मानि
सम्यक् (तीनों युग्म सही हैं)।
सही युग्मों का विवरण:
1.
रससिद्धान्तः : भरतमुनिः
· यह युग्म
सही है।
·
भरतमुनि को
रस सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने अपने ग्रंथ
'नाट्यशास्त्र' के षष्ठ अध्याय में प्रसिद्ध
रससूत्र ("विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद् रसनिष्पत्तिः") का प्रतिपादन किया, जो रस सिद्धान्त का मूल आधार है।
2.
ध्वनिसिद्धान्तः : आनन्दवर्धनः
· यह युग्म
सही है।
·
आनन्दवर्धन को
ध्वनि सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने अपने ग्रंथ
'ध्वन्यालोक' में
ध्वनि (व्यंग्यार्थ) को ही काव्य की
आत्मा घोषित किया है ("काव्यस्यात्मा ध्वनिः")।
3.
काव्यप्रकाशः : मम्मटः
· यह युग्म
सही है।
·
काव्यप्रकाश ग्रंथ के रचयिता
आचार्य मम्मट हैं। यह ग्रंथ काव्यशास्त्र के एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ के रूप में प्रसिद्ध है, जिसमें काव्य के लक्षण, भेद, प्रयोजन, गुण, दोष और अलंकार आदि का विस्तृत विवेचन किया गया है।
रोचक तथ्य
· (a), (b), (d) विकल्प उपर्युक्त व्याख्या के आधार पर गलत सिद्ध होते हैं।
·
रस सम्प्रदाय को
नाट्यशास्त्र से प्रारंभ कर
विश्वनाथ (साहित्यदर्पण) ने पूर्णता प्रदान की।
·
आनन्दवर्धन द्वारा स्थापित
ध्वनि सिद्धान्त को बाद में
अभिनवगुप्त ने
'लोचन' टीका लिखकर और भी सुदृढ़ किया।
·
मम्मट को उनके ग्रंथ
'काव्यप्रकाश' के कारण
प्रकाशकार के नाम से भी जाना जाता है।