Correct option is D
सही उत्तर: (D) प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
व्याख्या:
हाथ कंगन को आरसी क्या" लोकोक्ति का अर्थ है- प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
"हाथ कंगन को आरसी क्या" एक प्रसिद्ध हिंदी लोकोक्ति है, जिसका अर्थ है कि जो चीज़ साफ़ और स्पष्ट है,
उसे साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। इसका तात्पर्य है कि जो चीज़ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है, उसका प्रमाण देने की जरूरत नहीं होती,
जैसे "हाथ कंगन को आरसी क्या", अर्थात कंगन को दिखाने के लिए आरसी (दर्पण) की आवश्यकता नहीं है, वह पहले से ही दिख रहा है।
वाक्य प्रयोग -
देश में चारों ओर नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आप चाहें तो अभी और यहीं देख लीजिए। हाथ कंगन को आरसी क्या।
हाथ कंगन को आरसी क्या" लोकोक्ति का अर्थ है- प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
"हाथ कंगन को आरसी क्या" एक प्रसिद्ध हिंदी लोकोक्ति है, जिसका अर्थ है कि जो चीज़ साफ़ और स्पष्ट है,
उसे साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। इसका तात्पर्य है कि जो चीज़ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है, उसका प्रमाण देने की जरूरत नहीं होती,
जैसे "हाथ कंगन को आरसी क्या", अर्थात कंगन को दिखाने के लिए आरसी (दर्पण) की आवश्यकता नहीं है, वह पहले से ही दिख रहा है।
वाक्य प्रयोग -
देश में चारों ओर नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आप चाहें तो अभी और यहीं देख लीजिए। हाथ कंगन को आरसी क्या।
विकल्पों का विश्लेषण:
विकल्प | विश्लेषण | सही / गलत |
|---|---|---|
(A) बुद्धिमान मनुष्य के लिए कोई काम कठिन नहीं है। | यह लोकोक्ति से संबंधित नहीं है। यह एक अलग विचार है। | गलत |
(B) विद्वान को धन की बहुत आवश्यकता है। | यह अर्थ भी लोकोक्ति से मेल नहीं खाता। | गलत |
(C) बिलकुल पढ़ा लिखा न होना। | यह लोकोक्ति के अर्थ से मेल नहीं खाता। | गलत |
(D) प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं। | यह सही है, क्योंकि इस लोकोक्ति का यही अर्थ है कि जो स्पष्ट है, उसे साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। | सही |
अतिरिक्त जानकारी:
लोकोक्ति:
किसी विशेष स्थान पर प्रसिद्ध हो जाने वाले कथन को 'लोकोक्ति' कहते हैं।
दूसरे शब्दों में जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धत किया जाता है तो लोकोक्ति कहलाता है।
इसी को कहावत भी कहते हैं।
लोकोक्ति:
किसी विशेष स्थान पर प्रसिद्ध हो जाने वाले कथन को 'लोकोक्ति' कहते हैं।
दूसरे शब्दों में जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धत किया जाता है तो लोकोक्ति कहलाता है।
इसी को कहावत भी कहते हैं।
परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|
"लोक उक्ति" शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है- लोक में प्रचलित उक्ति या कथन। जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धृत किया जाता है तो लोकोक्ति कहलाता है। इसी को कहावत कहते हैं। लोकोक्ति वाक्यांश न होकर स्वतंत्र वाक्य होते हैं। | 1.अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता - एक व्यक्ति के करने से कोई कठिन काम पूरा नहीं होता। |
----------- | 2.दुविधा में दोऊ गए, माया मिली न राम - अनिश्चित स्थिति में काम करने पर एक में भी सफलता नहीं मिलती। |
कुछ अन्य महत्वपूर्ण लोकोक्ति, अर्थ एवं उनका वाक्य प्रयोगः-
1. धोबी से पार न पावे, गधे के कान उमेठे-बलवान पर वश न चले तो निर्धन पर गुस्सा निकालना
वाक्य प्रयोग -
रमेश अपने साहब के सामने तो गिड़गिड़ाता रहता है और चपरासी पर रौब डांटता है - "धोबी से पार न पावे, गधे के कान उमेठे"।
2. टके की हांडी गई, कुत्ते की जात पहचानी गई-थोड़े ही खर्च में किसी के चरित्र को जान लेना
वाक्य प्रयोग -
जब रमेश ने पैसे वापस नहीं किए तो सोहन ने सोच लिया कि अब वह उसे दोबारा उधार नहीं देगा- "टके की होडी गई, कुत्ते की जात पहचानी गई"।
3. कौड़ी न हो पास तो मेला लगे उदास-धन के अभाव में जीवन में कोई आकर्षण नहीं
वाक्य प्रयोग -
सुधा अपनी आर्थिक स्थिति की वजह से कही नहीं जाना चाह रही थी क्योंकि "कौड़ी ना हो पास तो मेला लगे उदास"।
4. कहे खेत की, सुने खलिहान की- कहा कुछ गया और समझा कुछ गया
वाक्य प्रयोग-
राम का स्वभाव समझ नहीं आता। उससे कहो "खेत की तो वह सुनता है खलिहान की"।
1. धोबी से पार न पावे, गधे के कान उमेठे-बलवान पर वश न चले तो निर्धन पर गुस्सा निकालना
वाक्य प्रयोग -
रमेश अपने साहब के सामने तो गिड़गिड़ाता रहता है और चपरासी पर रौब डांटता है - "धोबी से पार न पावे, गधे के कान उमेठे"।
2. टके की हांडी गई, कुत्ते की जात पहचानी गई-थोड़े ही खर्च में किसी के चरित्र को जान लेना
वाक्य प्रयोग -
जब रमेश ने पैसे वापस नहीं किए तो सोहन ने सोच लिया कि अब वह उसे दोबारा उधार नहीं देगा- "टके की होडी गई, कुत्ते की जात पहचानी गई"।
3. कौड़ी न हो पास तो मेला लगे उदास-धन के अभाव में जीवन में कोई आकर्षण नहीं
वाक्य प्रयोग -
सुधा अपनी आर्थिक स्थिति की वजह से कही नहीं जाना चाह रही थी क्योंकि "कौड़ी ना हो पास तो मेला लगे उदास"।
4. कहे खेत की, सुने खलिहान की- कहा कुछ गया और समझा कुछ गया
वाक्य प्रयोग-
राम का स्वभाव समझ नहीं आता। उससे कहो "खेत की तो वह सुनता है खलिहान की"।
निष्कर्ष:
"हाथ कंगन को आरसी क्या" का अर्थ है "प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं"।
इसलिए, सही उत्तर: (D) प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं
इसलिए, सही उत्तर: (D) प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं