Correct option is B
सही उत्तर: (B) होनहार बिरवान के होत चीकने पात
उतार की व्याख्या: स्वामी रामतीर्थ के बचपन में राम और कृष्ण की कथाओं को सुनने से उनके रोम-रोम में प्रेम का संचार और आँखों में सजलता आ जाती थी। यह दर्शाता है कि उनके अंदर जन्मजात भावनाएँ और संस्कार थे, जो उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में परिलक्षित होते थे। इस संदर्भ में "होनहार बिरवान के होत चीकने पात" का अर्थ सही बैठता है, जो यह कहता है कि अच्छे और होशियार व्यक्ति का चरित्र और भावनाएँ स्वाभाविक रूप से अच्छे होते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
| विकल्प |
वाक्य में उपयुक्तता |
अर्थ |
| (A) हलक से निकली ख़लक में पड़ी |
असत्य |
यह मुहावरा निरर्थक या अप्रासंगिक प्रयास को दर्शाता है, जो इस संदर्भ में उचित नहीं है। |
| (C) होनहार मिटती नहीं होवे बिस्से बीस |
असत्य |
यह मुहावरा किसी व्यक्ति के गुणों या संकल्प को खत्म न होने की बात करता है, लेकिन यहाँ यह उपयुक्त नहीं है। |
| (D) हज़ारों टाँकी सहकर ही महादेव होते हैं |
असत्य |
यह मुहावरा संघर्षों के बाद महान बनने की बात करता है, जो इस स्थिति के लिए सही नहीं है। |